कवयित्री/लेखिका
सुश्री सरोज कंसारी
नवापारा राजिम, छत्तीसगढ़।
प्रेरक विचार
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विषय-बुजुर्गो का सम्मान
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(नया अध्याय, देहरादून)
हिंदी विषय की कक्षा चल रही थी, उसी समय प्रिया के पिताजी आएं और कहने लगे-मैडम जी प्रिया को घर ले जाना हैं। मैंने सहजता से पूछा- कोई जरूरी काम हैं क्या? उसने जवाब दिया हां मेरी माता जी का देहांत हो गया हैं। मैं थोड़ी भावुक होकर बोली-बहुत दुखद घटना हैं, क्या हो गया था माता जी को? उसने बहुत ही सामान्य भाव से कहा –कुछ नहीं बुजुर्ग हो गई थी, बहुत दिनों से बीमार थी अब उम्र भी तो हो गई थी,कब हुआ ? पूछने पर बताने लगे अभी तो हैं मैडम, तभी तो तुरंत आया हूं लेने, इतना कहकर वे चले गए। प्रिया भी पिताजी को देखकर उसके पास आ गई थी, सभी बात उसने भी सुनी। उनके जाने के बाद मैं वही सोचते खड़ी थी…! तभी मेरी सहपाठी ने कहा क्या बात हैं, क्या सोच रही हो ? मैंने कहा -क्या बुजुर्ग होने के बाद उनके प्रति कोई स्नेह-लगाव या अपनापन नही रहता उनके जाने का गम नही होता, बुजुर्ग माता-पिता के प्रति प्यार कम हो जाता हैं? उसने कहा- ऐसी कोई बात नही हैं, हमें तो उनकी बहुत जरूरत पड़ती हैं, किसने कहा? तब मैं बताई सब बातें तो मेरी सहपाठी बोली- सब ऐसे नही होते। माता- पिता की जरूरत उम्र के हर मोड़ पर होती हैं, ये हम पर निर्भर है हम उन्हें कितना सम्मान देते हैं, उनका कितना हम खयाल रखते हैं ? क्योंकि आज हम अपने माता-पिता की इज्जत करेंगे, तो वही हमारे बच्चें भी सीखेंगे। बहुत जरूरी हैं उनकी सेवा करना,जैसे हम देंगे वैसे ही तो पाएंगे।
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