राजेन्द्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत्त केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़।
(नया अध्याय, देहरादून)
बड़े लोग, बड़ी बातें
बातूनी सपने, झूठी सौगातें,
वचन की चमक, धूल में लिपटी,
अमीरों की हँसी, गरीबों की रातें।
महल बनाते हैं कागज के ताज पर,
नींव रखते हैं खोखले वादों पर,
हवा के घोड़े दौड़ाते हैं,
पर ज़मीं पर चलने वाले थक जाते हैं।
फिर भी आशा की किरण टिमटिमाती,
सपनों के पीछे भागते हम,
बड़े लोग भूल जाते हैं,
हमारी छोटी-सी दुनिया में बस जाते हैं।







