भारत का संविधान

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राजेंद्र रंजन गायकवाड 

(सेवा निवृत्त)

केंद्रीय जेल अधीक्षक, छत्तीसगढ़।

 

 

 

                        संस्मरण 20 

 

                    भारत का संविधान

 

                                          (नया अध्याय, देहरादून)

दुनिया के सबसे प्रशंसित और अनूठे संविधानों में से एक भारत का संविधान माना जाता है। इसे “सबसे महान” कहने के कई ठोस कारण हैं, जो इसे अन्य देशों के संविधानों से अलग और श्रेष्ठ बनाते हैं:

1. दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान

मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ अब 470+ अनुच्छेद हो गए हैं।

इसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति-विभाजन, मौलिक अधिकार, नीति-निर्देशक तत्व, आपातकालीन प्रावधान, संशोधन प्रक्रिया आदि सब कुछ विस्तार से लिखा है।

ब्रिटेन जैसे देशों का संविधान अलिखित और परम्परा-आधारित है, जबकि अमेरिका का संविधान सिर्फ 7 अनुच्छेद का है। भारत ने सभी संभावित स्थितियों को कवर किया।

2. विविधता में एकता का सबसे बड़ा प्रयोग

562 रियासतों को मिलाकर, 14 भाषाओं, सैकड़ों जातियों-उपजातियों, कई धर्मों और संस्कृतियों वाले देश को एक संवैधानिक ढांचे में बांधा।

दुनिया का कोई दूसरा देश इतनी भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और नस्लीय विविधता वाला नहीं है जिसने लोकतंत्र को इतने लंबे समय तक बनाए रखा हो।

3. लचीला और कठोर का अनोखा मिश्रण (Flexible + Rigid)

अब तक 106 संशोधन हो चुके हैं (2025 तक), यानी यह बदलते समय के साथ चलता है।

लेकिन मौलिक ढांचे (Basic Structure Doctrine – केशवानंद भारती केस, 1973) को संसद भी नहीं बदल सकती। यह संतुलन दुनिया में दुर्लभ है।

4. सामाजिक क्रांति का दस्तावेज

छुआछूत उन्मूलन (अनुच्छेद 17), समानता का अधिकार (14-18), महिलाओं-दलितों-आदिवासियों के लिए आरक्षण।

नीति-निर्देशक तत्व (DPSP) में गांधीवादी और समाजवादी विचारों का मिश्रण – यह संविधान केवल कानूनी नहीं, सामाजिक न्याय का औजार है।

5. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 1950 में ही

जब अमेरिका में अश्वेतों को वोटिंग राइट नहीं था (1965 तक), ब्रिटेन में महिलाओं को पूर्ण मताधिकार 1928 में मिला था, भारत ने 1950 में ही हर 21+ नागरिक (चाहे अनपढ़ हो) को वोट का अधिकार दे दिया।

→ दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जटिल लोकतंत्र एक झटके में शुरू हुआ।

6. स्वतंत्र न्यायपालिका और मौलिक अधिकार

अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार का अधिकार) को डॉ. आंबेडकर ने “संविधान का हृदय और आत्मा” कहा।

PIL (जनहित याचिका) जैसा कॉन्सेप्ट भारत ने ही दुनिया को दिया।

7. एक साथ तीन तरह की सरकारों का संघीय ढांचा

संघीय (Federal), एकात्मक (Unitary) और सामुदायिक (Community) विशेषताओं का मिश्रण।

जरूरत पड़े तो केंद्र बहुत ताकतवर (अनुच्छेद 356), शांति में राज्य स्वतंत्र।

8. दुनिया के सभी अच्छे संविधानों से लिया गया सर्वश्रेष्ठ

ब्रिटेन से → संसदीय प्रणाली

अमेरिका से → मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन

आयरलैंड से → नीति-निर्देशक तत्व

कनाडा से → संघीय ढांचा

जर्मनी से → आपातकालीन प्रावधान

→ इसे “Borrowed Constitution” नहीं, “Best Practices का संकलन” कहते हैं।

आंबेडकर का कथन (26 नवंबर 1949):

“मैं मानता हूँ कि संविधान अच्छा है या बुरा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे चलाने वाले लोग कैसे हैं। लेकिन यदि मैंसे पूछा जाए कि दुनिया में आज जितने भी संविधान हैं, उनमें यह सबसे अच्छा है या नहीं – तो मैं कहूँगा, हाँ,,,

भारत का संविधान सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक प्रयोग है जिसने अकल्पनीय विविधता और गरीबी के बावजूद 75+ साल से लोकतंत्र को जीवित रखा है।

इसीलिए नेहरू ने कहा था –

“यह संविधान एक मशीन नहीं, एक जीवंत वस्तु है – यह भारत की आत्मा है।”

इसलिए जब लोग कहते हैं कि भारतीय संविधान “सबसे महान” है – तो यह अतिशयोक्ति नहीं, ऐतिहासिक तथ्य है।

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