डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी
(नया अध्याय, देहरादून)
जिंदगी (मुक्तक)
जिंदगी अति खुशनुमा रंगीन है।
नीर भीतर खुश बहुत जिमि मीन है।
रंग का तेवर अधिक चटकोर है।
प्यार की महफ़िल सजी मधुलीन है।
मुस्कराता नित हृदय उदगार है।
स्नेह का अमृत पिलाता प्यार है।
नेत्र से है अश्रु धारा बह रही।
हँस रहा अब पीत रंगी यार है।
प्रिय मिलन की राह है अब खुल गयी।
जिंदगी की चाह प्यारी खिल गयी।
दूत का संदेश जाहिर हो गया।
प्रेम पूरित रागिनी अब मिल गयी।
प्राकृतिक सौंदर्य ऊपर चढ़ रहा।
आत्म का अविनाश पावन गढ़ रहा।
इक सुखद अहसास के आधार को।
रूप अनुपम मन मधुर बन बढ़ रहा।







