राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
कड़ाके की पूस की रात में
मंगलू खाली रिक्शे पर
पेपर ओढ़े सो था,
सवारी की तलाश में,
आधी रात पड़े
ठंड ने मंगल
उठा लिया बिना टिकिट,
सुबह – सुबह
लोगों का भारी हूजूम
पूछ रहा था ?
ये हत्या थी या आत्म-हत्या!
विवेचना कैसे करे?
थानेदार परेशान था,
हत्यारे की खोजबीन में,
कौनसा पेपर ओढ़ा है लाश ने?
संवाद-दाता थे हेडिंग की तलाश में ?
भीड़ पर भीड़ बड़ी जा रही थी
बड़ी घड़ी चौक पर,
बस मंगलू का कुत्ता रो रहा है
रुक रुक कर आधीरात से,
पालक की मौत पर,







