डॉ0 हरि नाथ मिश्र
पूर्व विभागाध्यक्ष-अँगरेजी,
का0 सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
अयोध्या, (उ0प्र0)
(नया अध्याय, देहरादून)
पुस्तक
वेद-बाइबिल-गुरुबानी सँग,
गीता और कुरान।
सभी पुस्तकें करें विवेचन,
जीवन-मूल्य महान।।
बने धरोहर केवल पुस्तक,
ज्ञान-कला-साहित्य।
करे प्रकाशित ज्ञान-ज्योति से ,
तिमिराच्छादित नित्य।
वाल्मीकि-रामायण तो है,
ज्ञान-कोष-वरदान।।
सभी पुस्तकें करें………….।।
संतों की वाणी से सिंचित,
उगे फसल जो ज्ञान।
ज्ञान-अन्न से निर्मित अक्षर,
गढ़ते पुस्तक-मान।
पुस्तक पढ़कर बनता मानव,
मानव एक सुजान।।
सभी पुस्तकें करें………..।।
अज्ञानी है ज्ञानी बनता,
पढ़कर पुस्तक नेक।
पथ-प्रदर्शिका बनकर पुस्तक,
देती सदा विवेक।
मिटा सकल अज्ञान-अँधेरा,
लाए ज्ञान-विहान।।
सभी पुस्तकें करें …………।।
गताक्षरों को साक्षर करती,
पुस्तक अक्षर-शाला।
साक्षरता का दीप जलाकर,
करे सतत उजाला।
पुस्तकीय माहात्म्य अकथ है,
मानव-जीवन-शान।।
सभी पुस्तकें करें विवेचन,
जीवन-मूल्य महान।।






