राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
नज्म
आपके लफ़्ज, महके न महके,
किरदार में खुश्बू दमकना चाहिये।
यूं तो,बातें तो हर कोई बना लेता है,
अदा में सादगी, झलकना चाहिये।
तन पर सोने के तार चमकें तो क्या,
ज़िंदगी में ख़ुद्दारी, चमकना चाहिये।
हवा में रंग बिखेरने वाले बहुत हैं,
बातों से लहज़ा,महकना चाहिये।
शब्दों का जादू थोड़ा देर ठहरेगा,
भावों की रंगत, उभरना चाहिये।
आपके लफ़्ज, महके न महके,
किरदार में ख़ुश्बू दमकना चाहिये।






