अदिती कुशवाहा बैकुण्ठपुर (कोरिया) छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
प्रभु श्री राम के नाम एक पैगाम
इतना न करो जात-पात के हितैषी,
प्रेम और संघर्ष का प्रतीक है यह दिवाली।
चेहरे पर मुस्कान तेरे भी है और मेरे भी,
राम का नाम लेता तू भी है और मैं भी।
खुशियों का यह प्रेमभरा त्योहार
हर किसी के घर में होना चाहिए,
चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो,
सिख हो या ईसाई हो।
हर घर में खुशियों के दीप जलें,
इसकी वजह तुम्हें भी बनना चाहिए।
न कर भेद तू जाति और धर्म का,
सबको मौका दे खुशियाँ मनाने का।
कुछ वस्तुएँ उनसे भी खरीद लेना,
जिन्होंने बड़े प्यार से तेरे त्योहार में
अपनी खुशियाँ जोड़ने की कोशिश की है।
यह प्रेम का रिश्ता है,
उन्होंने भी इसे निभाने की कोशिश की है।
तुम भी प्रेम से अब आगे बढ़ जाओ,
राम का नाम लेते-लेते
सारे जग से जाति और धर्म का भेद मिटाओ।

