संवाददाता अल्मोड़ाः दिनेश भट्ट
(नया अध्याय)
उच्च जिंक, प्रोटीन वाली मक्के की देश में पहली किस्म ‘वी एल सुपोषिता’ विकसित।
मक्के की नई किस्म ने टर्किकम पर्ण झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता प्रदर्शित।
अल्मोड़ा: विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) ने उच्च जिंक और गुणवत्ता युक्त प्रोटीन वाली जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का की नई संकर किस्म ‘वी एल सुपोषिता’ विकसित की है। वी एल सुपोषिता उच्च जिंक और क्यू पी एम के संयोजन वाली देश की पहली किस्म है। इसे उत्तर पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अधिसूचित किया गया है।
संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह जल्दी पकने वाली (90–95 दिन) संकर किस्म है। यह पोषण से भरपूर है। इसमें ट्रिप्टोफान 0.082 प्रतिशत, लाइसिन 0.357 प्रतिशत और जिंक की मात्रा 37.17 पी पी एम है। उत्तर पर्वतीय क्षेत्र में अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों में इसका औसत उत्पादन 6,819 किग्रा रहा। इसने टर्किकम पर्ण झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता प्रदर्शित की। यह प्रजाति पूरे उत्तर पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) में खेती के लिए अधिसूचित की गई है।
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शरीर में जिंक की कमी को दूर करेगी वी एल सुपोषिता
उच्च जिंक युक्त होने के कारण यह प्रजाति शरीर में जिंक की कमी को दूर करने में सहायक होगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस प्रजाति में आवश्यक अमीनो अम्ल लाइसिन और ट्रिप्टोफैन अधिक मात्रा में होने के कारण इसका प्रोटीन सामान्य मक्का की तुलना में अधिक गुणवत्तापूर्ण है।
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वी एल सुपोषिता उच्च जिंक और क्यू पी एम के संयोजन वाली देश की पहली किस्म हैं। यह प्रजाति किसानों की उच्च उपज, पोषण-संपन्न और रोग प्रतिरोधी मक्का किस्म तक पहुंच सुनिश्चित करने में सहायक होगी। इससे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और आय सृजन को बढ़ावा मिलेगा। यह नई किस्म किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर पोषण और स्थायी कृषि प्रथाओं की दिशा में मदद करेगी।








