सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका/रिपोर्टर/उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर – छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
“आज उपहार है, हृदय में फूल खिलाते रहो”
– सुश्री सरोज कंसारी
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इंसान के दुःख का कारण अपेक्षाएँ हैं। लोगों के विचारों से अपने जीवन जीने का तरीका मत बदलो। अपने जीवन में, अपने हृदय में फूल खिलाते रहना, इन्हें कभी मुरझाने मत देना। आगे बढ़ते जाओ, पीछे का भूलकर।
आज, यानी जो हमारे हाथ में है, कल जैसा भी था – बुरा, अच्छा, खराब – पर आज एक उपहार है, इसे हर साँस में पूरी तरह से जी लो। देखो, हमारे भीतर कितना ज्ञान निहित है। आदमी क्या नहीं कर सकता, सब कुछ कर सकता है, फिर भी क्यों कभी-कभी वह आतुर हो जाता है? क्या वह कुछ सोच लेता है? क्या उसका सोचना उसे ज़्यादा कमज़ोर बना देता है, जिससे सकारात्मकता की रौशनी कम होने लगती है?
सोचना बुरा नहीं है, पर ज़रूरत से ज्यादा सोचना बंधन बन जाता है। मन को शांत रखो, जो है उसे स्वीकार करो, जो नहीं है उसकी चिंता में आज को मत खोओ। तुम जहाँ हो, जैसे हो, वहीं से शुरुआत काफी है। एक छोटा कदम भी बड़ी मंज़िल की ओर ले जाता है।
सोचना अच्छा है, पर कम सोचना चाहिए और लिखना ज़्यादा चाहिए। निर्भीक और प्रतिभाशाली बनकर रहना चाहिए। जो है, उसे जी लो। ज्यादा सोचकर अपनी खुशियाँ दूर मत करो। जियो ऐसे, जैसे तुम एक जागृत आत्मा हो। खुद से प्रेम करो, प्रेमपूर्ण जीवन जीना चाहिए। प्रेम से रहना चाहिए। प्रेम का मार्ग ही कल्याण का मार्ग होता है। प्रेम, सद्भावना में ही ईश्वर का वास है। प्रेम ही ईश्वर है। सबके प्रति दयालु बने रहने की शक्ति भी प्रेम ही देता है।






