संत प्रेमानंद दस दिन बाद अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए जब भोर में चार बजे श्रीराधा केलिकुज से बाहर निकले तो भक्तों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा। पिछले 11 दिनों से अस्वस्थता के चलते संत प्रेमानंद की रात्रिकालीन पदयात्रा अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी थी। इससे भक्त मायूस हैं।
रातभर डेरा डाले रहते हैं भक्त
पदयात्रा के रास्ते में सन्नाटा रहता है। कुछ भक्त अब भी रातभर श्रीराधा केलिकुंज के बाहर डेरा डाले रहते हैं कि कब संत प्रेमानंद आश्रम से बाहर निकलकर उन्हें दर्शन दे दें। सोमवार सुबह चार बजे जब संत अपने अनुयायियों के साथ आश्रम से बाहर निकले तो भक्तों की खुशी का ठिकाना न रहा।
आश्रम से निकलकर संत प्रेमानंद ने करीब पांच सौ मीटर पैदल चलकर भक्तों को दर्शन दिए। चार अक्टूबर को श्रीराधा केलिकुंज ने संत प्रेमानंद की रात्रिकालीन पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की सूचना जारी कर दी थी। बावजूद इसके भक्तों की उम्मीदें नहीं टूटीं और रात में वे संत प्रेमानंद के दर्शन की इच्छा लेकर आते रहे।
बीमारी के कारण आश्रम से नहीं निकल रहे थे संत प्रेमानंद
पिछले दिनों अधिक बीमार रहने के कारण संत प्रेमानंद आश्रम से भी नहीं निकल रहे थे। सोमवार की सुबह चार बजे जैसे ही संत प्रेमानंद श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के द्वार से बाहर निकले तो भक्तों में उल्लास छा गया और जयकारों से वातावरण गूंज उठा।









