युगपुरुष कविवर सूर्य
भारतीय दार्शनिक-मानवतावादी
(नया अध्याय, देहरादून)
हे मनुज, समाधान तू है !
_{कविता}_
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हे मनुज, माना कि इस संसार में !
प्रत्येक मनुष्य के हिस्से कष्ट आए,
पर याद रख, तू समस्या नहीं,
तू तो स्वयं समाधान है।
इस संसार में असंभव कुछ नहीं,
बस निर्भर ये तुझ पर है।
अगर हौसला न हारे तू,
तो जो ठान ले, वो कर भी ले।
तुझे जहाँ जाना है,
वहाँ पहुँचे बिना चैन कहाँ?
मंज़िल को पाकर ही तो
मन को संतोष मिलेगा वहाँ।
“आँधी और तू !”
(लघु कविता)
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कष्ट आएँगे जरूर,
आँधी बनकर,
परन्तु,
तू हारने के लिए नहीं बना।
तेरे हौसले में ही,
दीप-शिखा-सा,
हर मुश्किल का हल छिपा है।
क्योंकि…
तुझे मंजिल का पता है।







