सौजन्यः कुमार संदीप
मुजफ्फरपुर, बिहार
(नया अध्याय, देहरादून)
निक्की शर्मा- साहित्य, संवेदना, सामाजिक चेतना और नारी शक्ति का अनुपम संगम।
आदरणीया डॉ. निक्की शर्मा “रश्मि” का व्यक्तित्व साहित्य, संवेदना, सामाजिक चेतना और नारी शक्ति का अनुपम संगम है। बिहार की सांस्कृतिक धरती भागलपुर से निकलकर मुंबई जैसे महानगर में अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली आदरणीया निक्की ने अपने अथक परिश्रम, रचनात्मक सोच और साहित्य साधना के बल पर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर के रूप में 365 दिनों तक लगातार अखबारों, पत्रिकाओं और पोर्टलों में प्रकाशित होने का अद्भुत रिकॉर्ड उनकी निरंतर लेखन साधना, अनुशासन और साहित्य के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण है। कविता, कहानी और आलेख जैसी विभिन्न विधाओं में उनकी लेखनी मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत सहजता और भावपूर्ण शैली में अभिव्यक्त करती है।
उनकी चर्चित कहानी संग्रह “एहसास” को प्राप्त शकुंतला सिरोठिया सम्मान तथा बेस्ट कवर अवार्ड उनके साहित्यिक योगदान की गरिमामयी उपलब्धियाँ हैं।
लेखन के साथ-साथ डॉ. निक्की शर्मा “रश्मि” सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। नारी शक्ति योजना, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ अभियान, कोरोना जागरूकता अभियान और ग्रीन इंडिया परिवार जैसे अनेक जनहितकारी कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका समाज के प्रति उनके संवेदनशील हृदय को दर्शाती है।
वे केवल एक लेखिका ही नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं।

राइजिंग इंडिया टुडे की उपसंपादक, देशांतर टुडे की मुख्य संयोजक, विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं की सलाहकार एवं अंतरराष्ट्रीय एम्बेसडर के रूप में उनकी सक्रियता साहित्यिक जगत में उनके सम्मानित स्थान को दर्शाती है। भारत से लेकर अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान और नेपाल तक उनकी रचनाओं का प्रकाशित होना उनके वैश्विक साहित्यिक प्रभाव का परिचायक है।
सरलता, संवेदनशीलता, कर्मनिष्ठा और सृजनशीलता से परिपूर्ण आदरणीया डॉ. निक्की शर्मा “रश्मि” आज साहित्य जगत की उन प्रेरणादायी हस्तियों में शामिल हैं, जिनकी लेखनी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की अलख जगाने का कार्य कर रही है। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो शब्दों की शक्ति से समाज को बेहतर बनाने का सपना देखता है।






