संवाददाता आगर-मालवाः गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय, देहरादून)
नेशनल लोक अदालत में सुलझे वर्षों पुराने विवाद…336 प्रकरणों का निराकरण, करोड़ों की वसूली और टूटते रिश्तों में लौटी मिठास।
आगर-मालवा: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आगर-मालवा के तत्वावधान में आगर मालवा जिले के न्यायालयों में शनिवार को आयोजित वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत ने न्याय के साथ-साथ रिश्तों को भी नई दिशा दी। जिला मुख्यालय आगर-मालवा सहित सुसनेर एवं नलखेड़ा न्यायालय परिसर में आयोजित इस लोक अदालत में वर्षों पुराने विवाद आपसी समझौते से समाप्त हुए और कई बिखरे परिवार पुनः एक हो गए।
मुख्य न्यायाधिपति म.प्र. उच्च न्यायालय जबलपुर श्री संजीव सचदेवा के द्वारा प्रातः 10 बजे वर्चुअल माध्यम से सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में नेशनल लोक अदालत का शुभांरभ किया गया। जिला न्यायालय आगर में आयोजित नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री डी.एस. चौहान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम में न्यायाधीशगण, सचिव अधिवक्ता संघ देवेंद्र कोठारी, श्री राकेश मारू, अभियोजन अधिकारी, बैंक, विद्युत विभाग, नगरपालिका के अधिकारी-कर्मचारी एवं पैरालीगल वालंटियर्स उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रधान जिला न्यायाधीश श्री चौहान ने कहा कि लोक अदालत सस्ता, सरल और त्वरित न्याय प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। यहां कोई हारता या जीतता नहीं, बल्कि दोनों पक्ष संतुष्ट होकर निकलते हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं से अधिक से अधिक प्रकरण लोक अदालत के माध्यम से निराकृत कराने की अपील की। इस अवसर पर प्रथम जिला न्यायाधीश आगर-मालवा श्री नीतिराज सिंह सिसौदिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों में दी जा रही छूट का अधिक से अधिक लाभ ले । सचिव श्रीमती अश्विनी सिंह ने सुलह समझौता के माध्यम से राजीनामा कराने के लिए प्रेरित सभी को प्रेरित किया ।
लोक अदालत में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरण, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, विद्युत अधिनियम, पारिवारिक विवाद, दीवानी प्रकरण एवं बैंक ऋण वसूली सहित विभिन्न मामलों का निराकरण किया गया।
10 खंडपीठों में हुआ निराकरण
नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित 314 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 144 मामलों का निराकरण हुआ। वहीं 583 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में से 192 मामलों का समाधान कर लगभग 57 लाख 53 हजार रुपये की वसूली की गई। इस प्रकार कुल 897 प्रकरणों में से 336 प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया। चेक अनादरण के 9 मामलों में लगभग 20 लाख 82 हजार रुपये की राशि पर समझौता हुआ। वहीं 28 पारिवारिक विवादों का समाधान कर टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ा गया। कई पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहनाकर पुनः साथ रहने का संकल्प लिया।
लोक अदालत में राजीनामा करने वाले पक्षकारों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पौधे वितरित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
सफलता की कहानियां बनी लोक अदालत की पहचान
दो वर्ष बाद फिर दंपत्ति की नए जीवन की शुरुआत
द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री मधुसूदन जंघेल के न्यायालय में लंबे समय से लंबित पारिवारिक विवाद का समाधान आपसी समझौते से हुआ। घरेलू विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के कारण लगभग दो वर्षों से अलग रह रहा दंपत्ति लोक अदालत में समझाइश के बाद पुनः साथ रहने को तैयार हो गया। समझौते के बाद दोनों पक्षों ने मानसिक शांति और नए जीवन की शुरुआत की खुशी व्यक्त की।
पिता-पुत्र के बीच खत्म हुआ जमीन विवाद
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती मोनिका यादव के न्यायालय में जमीन बंटवारे को लेकर चल रहे पिता-पुत्र विवाद का भी सुखद अंत हुआ। समझाइश के बाद छोटे पुत्र ने अपने पिता और बड़े भाई से माफी मांगते हुए राजीनामा किया। इसके बाद परिवार में फिर से सौहार्द का माहौल बना। पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को फलदार पौधे भेंट कर सुखद भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।






