
सम्पादक अल्मोड़ाः नवीन बिष्ट
(नया अध्याय, देहरादून)



सुरों व तबला की जुगलबन्दी की मोहक प्रस्तुति
लखनऊ घराना खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खां की याद में जुटे नामचीन फनकार।
अल्मोड़ाः लखनऊ घराना खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खां की याद में सुरों और तबला की जुगलबन्दी ने संगीत संध्या को खूबसूरत बना दिया । इस साँवली शाम में ओर जहां प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका रश्मि चौधरी ने सधे सुरों से जहां पूरी महफिल को रागों के रस में सराबोर कर दिया वहीं उस्ताद इल्मास हुसैन खां ने अपने हस्तलाघव से अपनी कठोर साधना का परिचय कराया। अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध तबला वादक पं योगेश समसी की तबला पर प्रवाहित लयकारी ने रसिक दर्शको बांध दिया। लखनऊ घराना तबला के खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खाँ साहब की स्मृति में एक भव्य शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन शारदा पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उस्ताद अफाक हुसैन वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकार नवीन बिष्ट एवं अन्य सम्मानित अतिथिगणों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
उसके बाद शारदा पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत से किया गया।इस कार्यक्रम में श्रीमती लता पांडे जी, पंडित चन्द्रशेखर तिवारी जी, श्री प्रभात शाह जी, और निर्मल पंत जी इन अतिथिगणों को संगीत के क्षेत्र में उनकी विशेष उपलब्धियों, समर्पण और सहयोग के लिए स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथि उस्ताद इल्मास हुसैन खान साहब को शाॅल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति के रूप में अल्मोड़ा के राजेंद्र सिंह नयाल और सुनील कुमार के शिष्यों ऋतु जोशी और राजकुमार द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत तबले पर जुगलबंदी की एक अद्भुत प्रस्तुति दी गई जिसमें श्रीमती नेहा मुनगली ने हारमोनियम में लहरा दिया जिसे दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया। अगले क्रम में लखनऊ की शास्त्रीय संगीत गायिका श्रीमती रश्मि चौधरी द्वारा राग पूरिया कल्याण में विलम्बित बन्दिश एकताल में निबद्ध जिसके बोल–आकुल नैना मोरे तथा द्रुत बन्दिश तीनताल में जिसके बोल थे किन फल पायो प्रीत किये फिर एक तराना। इसके बाद मिश्र खमाज में बाल गणेश की नृत्य का स्तुति वर्णन था। रश्मि जी ने अपने गायन का समापन एक दादरे से किया जिसके बोल थे गंगा रेती पे बंगला छवाय दा मोरे राजा। जिसे श्रोताओं ने खूब पसन्द किया। इनके साथ तबले पर संगत की उस्ताद इल्मास हुसैन खाँ साहब ने, हारमोनियम पर थे अयोध्या के दिनकर द्विवेदी जी, तानपुरे पर संगत ऋतु जोशी और नेहा मुनगली ने की। कार्यक्रम के समापन में इस कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति मुम्बई के पंडित योगेश समसी जी ने एकल तबला वादन के रूप में दी। जो पंजाब घराने के उच्च कोटि के तबला हैं। उन्होंने पंजाब अंग के पेशकार से अपने वादन का आरम्भ किया तत्पश्चात कायदा, रेला, टुकड़ा, गत और चक्रदार परन इत्यादि की बहुत सुंदर प्रस्तुतियां दी। जिसे उपस्थित सभी संगीत प्रेमियों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खान के पट शिष्य श्री पंकज कुमार चौधरी, शारदा पब्लिक स्कूल के संस्थापक श्री शेखर लखचौरा, प्रधानाचार्या श्रीमती विनीता लखचौरा का विशेष योगदान एवं अल्मोड़ा शहर के नामचीन श्री राघव पंत, श्री अशोक पांडेय, श्री राजेंद्र सिंह नयाल और श्री सुनील कुमारण इन लोगों का इस शास्त्रीय संगीत समारोह को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास रहा। इस कार्यक्रम में मंच संचालन माधुरी केड़ा जी और भास्कर साह जी ने किया।








