सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री एवं शिक्षिक
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा (राजिम)
रायपुर (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
‘निःशब्द की गूँज’ (कविता)
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कभी किसी मोड़ पर गर हो,
विपरीत स्थिति का सामना।
धैर्य का दामन थामना तुम,
हिम्मत कभी न हारना ॥
टूटने लगे जब रिश्तों की कड़ी,
प्यार से उन्हें थाम लेना।
घेरें निराशा के बादल कभी,
तो आशा बन बरस लेना ॥
बोझिल न करना कभी मन को,
कुछ समझना, कुछ समझा देना।
क्रोध की अग्नि को त्याग कर,
मन शांत सरोवर बना लेना ॥
जिंदगी के इस अंतर्द्वंद में,
उलझनें मिलकर सुलझा लेना।
थाम कर हाथ अपनों का,
उम्मीदों का घर बना लेना ॥






