निक्की शर्मा रश्मि
मुम्बई
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
जिंदगी खूबसूरत है।
जिंदगी खूबसूरत है। हर पल तब और भी हसीन हो जाता है जब दोस्तों का साथ हो, सावन की फुहार हो, हरियाली हो, साथ में बारिश की बूंदें हों, पुरानी यादें हों। नाचना-गाना, शरारत और कुछ पल साथ बिताना—सबसे खूबसूरत पलों में से एक, यादगार लम्हा बन जाता है।
सावन की फुहार और दोस्तों का साथ मानो हर गम, हर तकलीफ, हर जिम्मेदारी से बाहर निकालकर हमें अपनी ज़िंदगी जीने का मौका देते हैं। बस हम और हमारे दोस्त… यही सबसे खूबसूरत समय होता है। सावन की मस्ती के साथ दोस्तों का साथ मानो हर बार एक नई ऊर्जा भर देता है। अपनी रूटीन से बाहर निकलकर कुछ खुशियां बटोरकर, नई ऊर्जा के साथ हम वापस अपने घर लौट आते हैं। यह नई ऊर्जा हमारे जीवन को ताजगी देती है।
सावन की हर बूंद के साथ शुरू होता है सजना-सँवरना। महिलाओं के लिए यह खास समय होता है। यह एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। सोलह श्रृंगार में सजी सभी महिलाएँ सावन मिलन का उत्सव करती हैं, एक-दूसरे के साथ अपना समय बिताती हैं और खूबसूरत यादों को लेकर वापस लौट जाती हैं।
दोस्ती, हंसी और सावन की फुहार मानो जन-जन का साथ बन जाता है। सारी खुशियां एक तरफ और दोस्तों के साथ बिताया पल एक तरफ। सावन की बूंदें पेड़-पौधों को हरा-भरा करती हैं, साथ ही दोस्ती के रिश्तों को भी ताज़ा कर देती हैं। सावन की फुहार की हर बूंद मानो हरियाली और खुशियों का एहसास होती है। इस तरह दोस्तों के साथ मिलते ही चेहरों पर रौनक आ जाती है और चारों तरफ हरियाली छा जाती है।
सावन उत्सव और दोस्तों का साथ—नृत्य, संगीत, सोलो डांस, गीत, कजरी और विभिन्न खेलों के साथ दोस्तों का प्यार सब सावन की फुहार जैसा आनंद से भर देता है। चारों तरफ हरियाली हो जाती है। इस तरह दोस्तों का साथ मन को हर्षित करता और ताजा कर देता है।
सावन एक पवित्र और सांस्कृतिक उत्सव होता है और दोस्तों का साथ मजा दुगना कर देता है। दोस्तों के साथ मस्ती जिंदगी को खूबसूरत बना देती है। तो खूब मस्ती कीजिए और जिंदगी को खूबसूरत रहने दीजिए। सावन और दोस्ती का रिश्ता बहुत खूबसूरत है। सावन मिलन में दोस्तों के साथ प्यार का मजा ही अलग है।
सावन उत्सव और दोस्ती पर महिलाओं के विचार:
निद्रीता राय – लंबे अरसे बाद कुछ दोस्तों का साथ किसी अद्भुत खजाने की तरह है। मैं नहीं चाहती कि वो कभी हमसे नाराज हों या हमसे दूर हों। उन्हें याद करते ही मेरी सारी समस्याएँ दूर हो जाती हैं और ऐसा एहसास होता है। और जब उनसे दूर होती हूँ तो लगता है जैसे खजाना लूट गया। मेरी प्यारी सहेलियों।
भारती –
तुमसे मिलकर लगा ये जिंदगी पूरी हुई,
फिर लगा कि मिलने में देरी क्यों हुई।
चलो अब मिल ही गए हैं तो ये ठान लेते हैं,
दरारें जितनी भी आएं पर ये मान लेते हैं।
तुम हो तो हम हैं, हम हैं तो तुम हो।
इस कदर इस रिश्ते को एक पहचान देते हैं।
लक्ष्मी राय –
कभी जिंदगी बस काम और मंजिलों का सफर थी,
तुम मिलीं तो जीना भी सीख लिया।
कॉफी, गपशप, छोटी-छोटी खुशियों को हर दिन खुलकर जीना सीख लिया।
मेरे सुख-दुख और हर मोड़ पर तुमने जो साथ निभाया है,
मेरी जिंदगी का सबसे सुंदर अध्याय—मेरी प्यारी सहेलियों, तुम्हीं को पाया है।
अंशु –
मेरी साँसों की धड़कन की तार हैं सखियाँ।
मेरे दिल में गुल, गुलशन, गुलजार हैं सखियाँ।
मौसम की बसंती बहार हैं सखियाँ।
सावन की झरती फुहार हैं सखियाँ।
मेरे दिल का प्यार हैं सखियाँ।
महाश्वेता मनोज –
ओ सखियों,
तुम्हारा साथ जैसे आसमान में पूर्णिमा का चाँद,
तुम्हारा साथ जैसे माथे की बिंदी,
तुम्हारा साथ जैसे खिले फूलों की सुगंध,
तुम्हारा साथ जैसे पहली बारिश की फुहार,
तुम्हारा साथ जैसे हाथों की चूड़ियों की खनक,
तुम्हारा साथ जैसे बाँसुरी की मधुर धुन।
रूबी शाही –
जैसे फूल की खुशबू से बगीचा महकता है, वैसे दोस्त भी जिंदगी में एक फूल की तरह हैं। जिनके महकने से दिल बाग-बाग हो जाता है। जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, सिर्फ उसकी खुशबू ही काफी है दोस्तों के लिए।
इस सावन आप क्या कर रहें… दोस्तों के साथ आप भी मजे किजीए और खुश रहीये क्योंकि जिंदगी ना मिलेगी दोबारा।






