राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
नज्म
आसमाँ गर अपने, इरादों में मगन है,
हमने भी तो छूने की कसम खाई है।
उड़ान भरेंगे हम, हौसलों के पंखों से,
रुकावट को मिटाने की कसम खाई है।
तूफ़ान आएँगे, घने अंधेरे घिरेंगे हमें
हौसले दीप जलाने की कसम खाई है।
चाँद-तारे देखेंगे, हमारी मंजिल को,
आसमाँ की हदें, बुलादियों से शरमाई है।
इरादे वो हैं जो, मिट्टी को सोना बना दें,
हमने भी बेवफा से सीखी, वफाई है।






