अनुराग बघेल
बिजराकापा खुर्द मुंगेली
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
नमन करूँ, वंदन करूँ,
द्वारिका के स्वामी को,
जीवन की हर डोर सौंप दूँ,
मैं उस अंतर्यामी को।
हाथ जोड़कर द्वार पे आई,
सुन लो मेरी पुकार,
तेरी कृपा से चमके कन्हैया,
यह सारा संसार।।
निर्धन-दुखियों का तू ही,
सबका पालनहार है,
कृपा तेरी जिस पर हो,
उसका बेड़ा पार है।
हाथ में मुरली, होँठों पर
मुस्कान निराली,
जिसकी एक झलक पर
दुनिया हो जाए दीवानी।।
द्वारिका का राजा तू ही,
भक्तों का रखवाला,
मन का अंधकार मिटा दे,
ऐसा तू मुरलीवाला।
दुख की घड़ी में साथ न छोड़े,
थामे रहता हाथ,
ऐसा दयालु और न कोई,
जैसा मेरा नाथ।।
कालिया नाग से लड़ाई लड़ी,
यमुना की लहरों में,
काल बनकर जो डोल रहा था
गहरे पानी में।
मोह के बंधन तोड़,
कर्म की ज्योत जलाई,
गीता का ज्ञान सुनाकर,
जिसने अर्जुन को राह दिखाई।।
सुंदर दिखे मोर-मुकुट,
गले में फूलों का हार,
रास रचाए यमुना तट पर,
देखे पूरा संसार।
बजे मीठी बाँसुरी तो,
राधा दौड़ी आए,
रूप तेरा जो देख ले,
वो तुझमें ही खो जाए।।
चिंता छोड़ो सुख-दुख की,
हरि के गुण गाओ,
द्वारकाधीश के चरणों में,
अपना शीश तुम झुकाओ।
शरण में आया जो भी उसकी,
खाली हाथ न जाए,
भर दे खुशियों से झोली वो,
सबको गले लगाए।।






