सुल्तान ए. गहलोत
कवि एवं अध्यापक
पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
अलीगढ़, (उ. प्र.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
दिल में बसाए बैठे हैं (गजल) —
सुल्तान ए. गहलोत
जो टूटकर भी न बिखरे वो दिल बनाए बैठे हैं
हम अपनी हार को भी हौसला बनाए बैठे हैं
उम्र भर मोहब्बत का भरम रखने के लिए
हम उसकी याद को दिल में बसाए बैठे हैं
मुझको समंदरों ने डराया बहुत मगर फिर भी
हम अपनी आँखों में कई साहिल सजाए बैठे हैं
वो जमाने की निगाहों में बड़े होंगे मगर
हम भी खुद्दारी का परचम लहराए बैठे हैं
किसी ने पूछा नहीं कभी हाल-ए-दिल हमारा
हम अपने दिल में कई जख्म छुपाए बैठे हैं







