राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सच्चा इंसान
(कविता)
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दुनियां मरी जा रही है दिखावे में,
मैं जिये जा रहा हूं सादगी के लिए।
मुखौटों के इस शहर में,
हर कोई पहचान ढूंढ रहा है,
कोई महंगे लिबास में,
तो कोई आलीशान मकान में
अपनी झूठी शान ढूंढता है।
भीड़ जुटी है यहाँ सिर्फ़
दूसरों को दिखाने के लिए,
पर मैं अकेला ही सही आज
अपनी आत्मा को जगाने के लिए।
चमक-दमक की इस दौड़ में,
सुकूँ कहीं पीछे छूट गया,
दिखावे की इस कड़ी धूप में,
सादगी का हर रिश्ता टूट गया।
लोग जी रहे हैं यहाँ बस
दूसरों की नजरों में अमीर दिखने के लिए
और मैं कोशिश करता हूँ बस
ज़मीन से जुड़कर सदा झुकने के लिए
मुझे और कुछ नहीं कहना है किसी से
मुझे तो सादगी से भरा फ़क़त
एक सच्चा इंसान चाहिए।







