राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गजल
साजिशों में, अमन आए कैसे,
घने कुहरे में गगन दिखाए कैसे?
खुशनुमा जिन्दगी की चाहत में,
बिरहा के गीत, कोई गाए कैसे?
जिसे देखो, देवता बना फिरता है,
आदमी होकर पहले दिखाए कैसे?
होश रहता, तो इश्क होता क्या ?
बेहोशी की दास्ताँ, अब सुनाए कैसे?
किसे भला और किसे बुरा कहें “रंजन”
उस बे-वफा के, किस्से बताए कैसे?






