राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
मधुर वाणी, दगाबाज की निशानी
मीठी बातों में, छिपा धीमा जहर,
हँसते चेहरे पर, नकाब गहरा है।
बोलता है, मधुर स्वर में,
छुपाता है, धोखे का कहर,
मीठे बोलों की मिठास मत चखो,
शहद नहीं, ये जाल है फँसाने का।
जो मुस्कान में, छुपाए छल,
वही तोड़ता, भरोसे का बल।
दगाबाज की पहचान पुरानी है
सामने मीठा, पीछे बदज़ुबानी है।
मधुर वाणी, उसकी निशानी है,
जो दिल को छलकर दूर चला है।
सच कड़वा लगता है, पर सच्चा है,
झूठ मीठा लगता है, पर झूठा है।
इसलिए सावधान रहो “रंजन” जॉनी
मधुर वाणी है दगाबाज की निशानी।






