नवीन डिमरी ‘बादल’
‘सरस्वती सदन’, डिम्मर (सैण)
सिमली, चमोली (उत्तराखंड)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गजल
तुम तो हो एक बस हजारों में,
चाँद होता है ज्यूँ सितारों में।
अब भला तुमसे क्यों निभे मेरी,
आ गया है फर्क जब विचारों में।
जो नहीं हम जुबाँ से कह पाये,
कह गये तुम वो सब इशारों में।
वो शजर क्यों डरेगा पतझड़ से,
सूखता हो जो खुद बहारों में।
वो करेगा पार नदिया कैसे,
डूबता हो जो खुद किनारों में।
जिसको अपनो का ही सहारा था,
वो ही तनहा मिला हजारों में।
जिसने बाँटे थे फूल दुनिया को,
वो घिरा हुआ है खारों में।
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