प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी
आचार्य, (सी ए)
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
देशप्रेम — गजल
विधा – गज्जल
रदीफ — “है वतन” काफिया
— “निशान, अरमान, सम्मान, ईमान।
दिल में भारत की सदा, एक निशान है वतन,
जान से प्यारा हमें अपना हिंदुस्तान है वतन।
माटी इसकी चूमकर, मिलता नया अरमान है,
वीरों के बलिदान से ऊँचा सम्मान है वतन।
गंगा-जमुनी प्रेम की बहती यहाँ धार है,
हर धर्म का मान रखने वाला महान है वतन।
सीमा पर जो प्राण दें, उनको शत-शत नमन,
उनकी वीरगाथाओं का अमर गान है वतन।
तिरंगा जब आसमाँ में शान से लहराए,
हर भारतीय के हृदय का स्वाभिमान है वतन।
जाति-भेद भूलकर हम साथ मिलकर चलें,
एकता की शक्ति का सुंदर प्रमाण है वतन।
ज्ञान-विज्ञान के पथ पर बढ़ता रहे देश,
युवा सपनों की आँखों का नया बिहान है वतन।
मेहनत से खेतों में किसान जब अन्न उगाए,
धरती माँ के आँचल की मुस्कान है वतन।
सत्य, अहिंसा, त्याग की परंपरा सँजोए,
मानवता की राह दिखाता महान है वतन।
‘शंकर’ लेखनी से यही संदेश दें सदा,
भारत माता के चरणों में मेरा अभिमान है वतन।





