सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका/रिपोर्टर/उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर – छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
ज्यादा सोचो मत, ज्यादा जियो
: सुश्री सरोज कंसारी
”मानसिक सुकून ही असली मंजिल है।
रुकना भी जरूरी है।”
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आज इंसान को सबसे ज्यादा जरूरत है मानसिक स्थिरता की, मानसिक सुकून की। यह तभी मिलता है जब वह अनावश्यक सवालों के घेरे से एकदम आजाद हो जाता है। खुलकर हँसता है, खुलकर जीता है। कुछ नहीं सोचता, सब अपने आप ठीक हो जाता है।
मनुष्य कभी-कभी इतना परेशान हो जाता है कि उसे कुछ समझ नहीं आता कि वह क्या करे, जो समस्या का सामना करके सब ठीक कर दे। वास्तविकता के साथ जीवन जीना चाहिए, हमेशा सकारात्मकता के साथ। हमेशा खुश रहकर जीवन जीना चाहिए, अपने मन को प्रसन्न रखना चाहिए।
जियो ऐसे जैसे तुम एक ऐसी आत्मा हो जो जगी हुई है और दूसरों को भी जगाना चाहती है। हमेशा सब कुछ सोचने की आवश्यकता नहीं है। यह जीवन है, इसे जियो। ज्यादा सोचो मत, ज्यादा लिखो नहीं, ज्यादा समझो मत! ज्यादा जियो।
आदमी एक मुसाफिर तो है, पर क्या वह हमेशा दौड़ ही लगाता रहेगा? रुकना चाहिए, रुककर देखना चाहिए। मंजिल जीवन का नाम नहीं है, जीवन यानी चलते जाना है।






