संजय सोंधी
(संयुक्त निदेशक)
शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गजब इंडिया: साड़ी में मैराथन, फायर ब्रिगेड से घर की
धुलाई और शटर के पीछे रोते चोर!
अगर आपको लगता है कि दुनिया में बोरियत छा गई है और जीवन में मनोरंजन के लिए आपको किसी महँगे ओटीटी प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लेना ही पड़ेगा, तो आप गलत हैं। हमारे देश और दुनिया में ऐसे-ऐसे तेजस्वी और महान लोग मौजूद हैं, जिनकी हरकतें और कारनामे किसी भी बेहतरीन कॉमेडी शो को आसानी से मात दे सकते हैं। शुरुआत करते हैं झारखंड के एक अद्भुत खेल प्रदर्शन से, जहाँ महिलाओं ने दुनिया को साबित कर दिया है कि उन्हें दौड़ने के लिए किसी विदेशी ब्रांड के महँगे स्पोर्ट्स शूज या एरोडायनामिक ट्रैकसूट की कतई कोई जरूरत नहीं है। यहाँ होमगार्ड की भर्ती दौड़ में एक महिला ने बाकायदा पूरी साड़ी पहनकर 1600 मीटर की फर्राटा दौड़ लगा दी। दुनिया भर के जो धावक हवा के दबाव को कम करने के लिए लाखों रुपये के कपड़े पहनते हैं, उन्हें अब भारत आकर साड़ी के पल्लू को सेफ्टी पिन से सेट करके दौड़ने की ट्रेनिंग जरूर लेनी चाहिए।
अब बात करते हैं हमारे नेताओं के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की, जिसका स्तर एक आम नागरिक की सोच से कहीं ज्यादा ऊपर है। आँखें खोल देने वाली खबर के मुताबिक, गुजरात में एक विधायक महोदय को अपने घर की साफ-सफाई और धुलाई की इतनी ज्यादा फिक्र हो गई कि उन्होंने अपना घर धोने के लिए सीधा फायर ब्रिगेड को ही फोन करके बुला लिया। आम आदमी जहाँ गर्मियों में एक बाल्टी पानी के लिए नगर निगम के टैंकर के पीछे-पीछे मीलों दौड़ता है, वहीं हमारे माननीय विधायक जी फायर ब्रिगेड के मोटे पाइप से अपने घर का आँगन चमका रहे हैं। कहीं किसी के घर में आग लगी हो तो वह अपनी सुविधानुसार बुझती रहेगी, लेकिन नेताजी के घर की टाइल्स चमकना सबसे ज्यादा जरूरी है।
इंसान तो इंसान, अब तो ऐसा लग रहा है कि जानवरों और मछलियों ने भी अपने पारंपरिक काम-धंधे छोड़ दिए हैं। समंदर में अब एक ऐसी मछली भी पाई गई है, जो पानी में तैरने के बजाय उसकी सतह पर मजे से चलती है। शायद यह मछली भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी तैर-तैर कर बुरी तरह थक चुकी है और अब इसे भी सुबह की मॉर्निंग वॉक का शौक चढ़ गया है। वहीं दूसरी तरफ, इंसानों को पानी इतना ज्यादा पसंद आ रहा है कि एक पूर्व नौसैनिक पिछले चार साल से अपना आलीशान घर-बार छोड़कर अपने पूरे परिवार के साथ एक नाव पर ही रह रहा है। मतलब गजब का तालमेल है, मछली अब चलना सीख रही है और इंसान ने पक्की जमीन छोड़कर नाव को ही अपना परमानेंट एड्रेस बना लिया है।
लेकिन इन सबके बीच, असली और विशुद्ध कॉमेडी तो अभी हाल ही में राजस्थान के नागौर में हुई, जहाँ कुछ ‘महान’ चोरों ने रातों-रात करोड़पति बनने का ऐसा मास्टरप्लान बनाया कि हॉलीवुड की क्राइम फिल्मों वाले भी शर्मा जाएँ। ये ‘चतुर’ चोर यूको बैंक का एटीएम काटने में पूरी शिद्दत से पसीना बहा रहे थे। मजे की बात यह है कि ये चोर कोई बाहर के नहीं थे, बल्कि उसी एटीएम के ठीक सामने अपना खुद का ढाबा चलाते थे। उन्होंने सोचा होगा कि दिन में ग्राहकों को दाल-रोटी खिलाएंगे और रात में एटीएम काटकर सीधे नोटों की गड्डियां उड़ाएंगे। लेकिन बेचारे यह भूल गए कि ई-सर्विलांस भी कोई चीज होती है। जैसे ही मशीन से छेड़छाड़ शुरू हुई, सीधे बैंक मैनेजर के फोन पर अलर्ट पहुँच गया। अब इत्तेफाक और उनकी खराब किस्मत देखिए, बैंक की यह साहसी महिला मैनेजर उसी बिल्डिंग की पहली मंजिल पर मजे से सो रही थीं।
मैनेजर साहिबा बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप सीढ़ियों से नीचे आईं और उन्होंने अंदर गैस कटर से पसीना बहा रहे उन ‘ढाबे वाले’ चोरों को बिना कोई डिस्टर्ब किए, सीधे एटीएम का शटर ही बाहर से नीचे गिरा दिया। बेचारों का करोड़पति बनने का सुनहरा सपना उस भारी शटर के अंदर ही हमेशा के लिए कैद हो गया। थोड़ी ही देर में पुलिस की गाड़ी जोर-जोर से सायरन बजाती हुई मौके पर आई। शटर ऊपर उठाया गया और पुलिस वालों ने ‘आओ मेरे लाल’ कहते हुए चोरों की जो शानदार सुताई की, वह देखने लायक थी। सबसे पहले उन्हें जोरदार थप्पड़ जड़कर उनका भव्य स्वागत किया गया और फिर कॉलर पकड़कर थाने ले जाकर उनके ‘ढाबे’ का सारा हिसाब-किताब हमेशा के लिए बराबर कर दिया गया। तो देखा आपने, हमारे देश में न तो साड़ी में दौड़ने वालों की कोई कमी है, न फायर ब्रिगेड से घर धोने वालों की, और न ही शटर के अंदर खुद को पैक करवाने वाले उन महान और कर्मठ चोरों की!






