राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सुकून
(कविता)
समाचार देखने-पढ़ने का मन नहीं करता
दिल कहता, दूर ही रहो झूठी सुर्खियों से।
अमूमन सुबह, अखबार, टी वी खोलते ही
दुनिया और ज्यादा भारी लगने लगती है,
रोज टेलिविजन की चमकदार स्क्रीन पर
सिर्फ़ शोर और आग की कहानियाँ हैं।
कहाँ गए वो, पुराने दिनो के समाचार
जहाँ थोड़ी खुशी भी छपी रहती थी?
अब तो हर चैनल, हर पन्ना, हर वक्ता
डर, नफरत और विवाद बाँटता है।
मन चाहता है, बंद कर दूँ सबको
फोन, टीवी, अखबार, इंटरनेट को
और कुछ देर बैठूँ चुपचाप अकेले,
पेड़ की छाँव में, किताब खोलकर।
समाचार तो आते रहेंगे, जाते रहेंगे,
लेकिन मेरा मन अब थक चुका है।
आजकल सिर्फ़ शांति, सुकून चाहिए,
थोड़ी-सी खुशी, जो अंदर से आए सदा।







