सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका,
रिपोर्टर और उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
उत्साह है तो असंभव कुछ भी नहीं!
: सुश्री सरोज कंसारी
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उत्साहित मन से ही हम बिखरे, उलझे और हारे जीवन की हर जंग जीत सकते हैं। हर कठिनाई को पार करने का एक सहज माध्यम है उत्साह। बिना उत्साह के आप जीवन के किसी भी पल का आनंद नहीं ले सकते। उत्साह के अभाव में गुजरा हर क्षण बोझिल होता है। एक उत्साहित मन ही जीवन की हर कठिनाइयों के बीच भी मुस्कुरा सकता है। जिनमें उत्साह नहीं, उनका जीवन बोझ तुल्य होता है। अपने हिस्से के हर कार्य को उत्साहित होकर करने से मानसिक मजबूती मिलती है। निराशाओं से भरी इस दुनिया में एक उत्साहित मन ही, हर पल को जीवंत बनाता है।
उत्साह अर्थात जीवन जीने की चाह, कुछ कर गुजरने की लगन होती है। एक उत्सुकता जो हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है। हर असंभव से पार निकलने की कला है उत्साह। उत्साहित मन ही हर बाधा को पार करने की क्षमता खुद में विकसित कर पाता है। उत्साहित होने से मानसिक थकान नहीं होती। उत्साहित होने से विकास के नए अवसर मिलते हैं। उत्साहित व्यक्ति हार को जीत में बदल देने की असीम शक्ति प्राप्त कर लेता है। भीड़ से अलग कुछ कर दिखाने का जज्बा है उत्साह। जिस मन में उत्साह की लौ जलती है, वो अँधेरे में भी रास्ते बना लेता है।
किसी कार्य को करने के लिए जब मन में उत्साह का संचार होता है तब आगे बढ़कर शुरुआत करने की हिम्मत खुद आ जाती है। जब मन उदासीन होता है तो कार्य करने की क्षमता भी कम हो जाती है। जीवन में कठिनाई आती है तो हमें कभी भी घबराना नहीं चाहिए। उत्साह के साथ हमें अपने हर काम को करना चाहिए। ”मनुष्य को बड़ा उसके विचार और उसकी उत्सुकता ही बनाए रखते हैं। जीवन में उत्सुकता बनी रहनी चाहिए।”







