हरी राम यादव
अयोध्या, (उ. प्र.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
वीरगति दिवस पर विशेष
पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा, शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
देश की आजादी के बाद से ही पड़ोसी देश पाकिस्तान अब तक हमारी सेना से तीन युद्ध लड़ चुका है, जिसमें उसे हर बार पराजय का सामना करना पड़ा है। आमने सामने के युद्ध में मुंह की खाने के बाद वह अपने जन्मकाल से ही छद्म युद्ध का सहारा ले रहा है और आये दिन किसी न किसी तरह से आतंकवादी भेजता रहता है और यह आतंकवादी देश में देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
06 अक्टूबर 2003 को पुंछ सेक्टर के सूरनकोट में 31राष्ट्रीय राइफल्स को एक गांव में आतंकवादियों के छुपे होने की सूचना मिली थी । 15:00 बजे सेना ने तलाशी अभियान शुरू किया। पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा उसी अभियान दल के सदस्य थे। टीम को गांव के एक घर में आतंकियों की मौजूदगी का शक था। शक के आधार पर सेना ने तुरंत घर को घेर लिया। जब सैनिक घर की जांच कर रहे थे तभी दो आतंकवादी अचानक एक साथ फायरिंग करते हुए और ग्रेनेड फेंकते हुए बाहर आए। निकास के बाहर खड़े पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा और अन्य सैनिकों को घायल कर दिया। गंभीर खतरे को भांपते हुए और सीने पर लगी बंदूक की गोली के घाव और ग्रेनेड के टुकड़ों की चोटों के बावजूद, पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा अडिग रहे। पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए अपूर्व साहस का प्रदर्शन किया और अपने हथियार से आगे बढ़ रहे आतंकवादियों पर लगातार फायरिंग की। इस वीरतापूर्ण कार्यवाही में उन्होंने दो आतंकवादियों को मार गिराया। इस बीच ज्यादा रक्तस्राव हो जाने और गहरी चोटों के कारण वह वीरगति को प्राप्त हो गये। पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा को उनके साहस और वीरता के लिए 06 अक्टूबर 2003 को मरणोपरान्त “शौर्य चक्र” से अलंकृत किया गया।
पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा का जन्म 10 अक्टूबर 1980 को जनपद आगरा के गांव प्रतापपुर में श्रीमती दिलू राणा और श्री राम बहादुर राणा के यहां हुआ था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल फाजिल्का और इंटरमीडिएट की शिक्षा आगरा से पूरी की और 15 दिसम्बर 1997 को भारतीय सेना में भर्ती हुए और प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात 4 पैरा विशेष बल में तैनात हुए। बाद में इनकी अस्थायी तैनाती 31 राष्ट्रीय राइफल्स में हुई थी। इनके परिवार में इनके माता पिता, दो भाई और दो बहन हैं। पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा राज्य स्तर के बॉक्सिंग चैंपियन भी रहे हैं।
यह बहुत ही सोचनीय बात है कि पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा के वीरता और बलिदान को याद करने के लिए राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है। मित्र मंडल संस्था आगरा द्वारा पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा की एक मूर्ति का निर्माण करवाया गया है। यहीं पर प्रतिवर्ष उनके वीरगति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। उनके परिजनों का कहना है कि हमारे बेटे ने राष्ट्र रक्षा में अपना बलिदान दिया लेकिन उनके सम्मान के नाम पर सब मौन हैं। उनके नाम पर घर को जाने वाली सड़क पर एक शौर्य द्वार का निर्माण होना चाहिए तथा सड़क का नामकरण वीर यौद्धा चेतन कुमार राणा के नाम पर होना चाहिए।
(पैराट्रूपर चेतन कुमार राणा 06 अक्टूबर को वीरगति को प्राप्त हुए थे लेकिन आगरा में इनकी अंत्येष्टि 08 अक्टूबर को हुई थी इसलिए इनका परिवार 08 अक्टूबर को इनका वीरगति दिवस मनाता है।)







