सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
तुंगनाथ धाम में तीर्थ यात्रियों की
संख्या ने बनाया नया कीर्तिमान।
1.56 लाख के पार पहुंचा यात्रियों का आंकड़ा।
कपाट बंद होने तक 1.80 लाख पार होने की उम्मीद।
ऊखीमठः हिमालय में समुद्रतल से सर्वाधिक ऊंचाई पर विराजमान तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष नए कीर्तिमान की ओर अग्रसर है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद तुंगनाथ धाम में दर्शन करने वाले तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा 1 लाख 56 हजार के पार पहुंच गया है। यात्रा में प्रति श्रद्धालुओं में बढ़ते उत्साह को देखते हुए कपाट बंद होने तक तीर्थ यात्रियों की संख्या 1 लाख 80 हजार के पार पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
तृतीय केदार तुंगनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष शुरुआत से ही श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान तुंगनाथ के दर्शन के लिए चोपता पहुंच रहे हैं और करीब चार किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर समुद्रतल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित धाम में पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यात्रा मार्ग में मौसम का मिजाज पल-पल बदलता रहता है, इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है।
तीसरे चरण में बढ़ी यात्रा की रफ्तार
यात्रा के तीसरे चरण में तुंगनाथ धाम में तीर्थ यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से तुंगनाथ घाटी सहित चोपता में भी रौनक बनी हुई है। देश-विदेश के पर्यटक और धार्मिक यात्रियों के लिए तुंगनाथ धाम अब प्रमुख आध्यात्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
यात्रियों की बढ़ती संख्या ने स्थानीय व्यापारियों, होटल, होम स्टे, घोड़ा-खच्चर संचालकों और अन्य पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की उम्मीदें भी बढ़ाई हैं। यात्रा से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व बना आकर्षण का केंद्र
पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजित भगवान तुंगनाथ का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने भगवान शिव की आराधना के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान किया था और पंच केदारों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। तुंगनाथ धाम उसी पौराणिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
धाम की प्राकृतिक सुंदरता भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। चारों ओर बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियां, हरे-भरे बुग्याल और शांत वातावरण यात्रियों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं। यही कारण है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ साहसिक पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के बीच भी तुंगनाथ यात्रा का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
कपाट बंद होने तक नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद
यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए इस वर्ष तुंगनाथ धाम में यात्रियों का नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है। वर्तमान में आंकड़ा 1.56 लाख के पार पहुंच चुका है और यात्रा के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। ऐसे में कपाट बंद होने तक यात्रियों की संख्या 1.80 लाख से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि तुंगनाथ धाम की बढ़ती लोकप्रियता के अनुरूप यात्रा व्यवस्थाओं को भी और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। विशेषकर पैदल मार्ग पर पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थलों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना जरूरी है, ताकि बढ़ती तीर्थ यात्री संख्या के अनुरूप श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।



तुंगनाथ धाम में इस वर्ष उमड़ा आस्था का सैलाब यह संकेत दे रहा है कि पंच केदार यात्रा देशभर में लगातार अपनी नई पहचान बना रही है। 1.56 लाख के पार पहुंचा यात्रियों का आंकड़ा जहां नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका है, वहीं कपाट बंद होने तक 1.80 लाख का आंकड़ा पार होने की संभावना तुंगनाथ यात्रा के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।








