राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
(लेख)
अहंकार और फालतू सोचना घातक बीमारी।
अभी हाल में महान चरित्र अभिनेता नाना पाटेकर जी का हृदयाघात से निधन हुआ। समाचार देखने/ पढ़ने में जानकारी मिली कि नाना अपने फार्म हाउस में अकेले रहते और स्मोकिंग के आदी थे। मृत्यु का कारण पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में आजकल में पता चलेगा। मेरा मानना है कि वर्तमान भौतिक वादी समाज में हर छोटा -बड़ा आदमी अपने अर्जित शीर्षस्थ स्थान (स्टेट्स) पर रहने के रात दिन भाग दौड़/ मेहनत कर रहा है। अधिकांश लोग येन- केन -प्रकारेन जब की स्टेटस (पद/ भूमिका) प्राप्त कर लेता है तो उसका Ego (अहंकार)
बड़ जाता है और रिश्तों को तोड़ लेते हैं। लोग उनसे दूर हो जाते हैं क्योंकि अहंकारी व्यक्ति सुनता नहीं, माफी नहीं मांगता, हमेशा खुद को सही मानता है और अकेलेपन का शिकार हो जाता है। उसकी संकुचित सोच कुछ नया सीखने और तरक्की को रोकती है। वह सोचता और कहता मैं सब जानता हूँ और अपनी गलतियों को छुपाता है और तब उसका विकास रुक जाता है। धीरे धीरे अकेलापन और असफलता बढ़ाता है। कई बड़े लोग गिरे सिर्फ इसलिए क्योंकि ego ने उन्हें सलाह, मार्गदर्शन feedback और वास्तविकता से दूर कर दिया है।
अहंकार से खतरनाक बीमारी है Overthinking (अत्यधिक सोचना)
दिमाग को थका देता है। छोटी-छोटी बातों पर बार-बार सोचने से anxiety, तनाव, नींद की समस्या और डिप्रेशन तक हो सकता है।
फैसले लेने की क्षमता खत्म कर देता है। “क्या होगा अगर…” वाली सोच में फंसकर इंसान कुछ भी नहीं कर पाता है। उसके पास सब कुछ होने के बाद अंधी चाहतों के बारे सोचकर
वर्तमान को बर्बाद करता है। दरअसल जो अभी हो रहा है, उसका मजा नहीं ले पाते क्योंकि दिमाग भूत या भविष्य में उलझा रहता है।
अगर किसी व्यक्ति को अहंकार और अत्यधिक सोचने की बीमारी है तो दोनों साथ में जब ego और overthinking मिल जाते हैं तो स्थिति और खराब हो जाती है। Ego कहता है “मैं सही हूँ”, overthinking कहता है “सब मुझे गलत समझ रहे हैं / सब साजिश कर रहे हैं”। मुझे कोई समझता, मैंने जीवन में बहुत कुछ करना चाहा, कर नहीं सका इसी का
नतीजा अनावश्यक गुस्सा, शिकायत, रिश्तों में दरार, काम में रुकावट और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी असर पड़ता है।
रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत खुशी, रिश्ते और काम तीनों प्रभावित होते हैं।
लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य (तनाव से) और अवसरों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन घातक इस मायने में नहीं कि ये आपको मार डालेंगे, बल्कि इस मायने में कि ये धीरे-धीरे आपकी जिंदगी की क्वालिटी खराब कर देते हैं। अच्छी बात यह है कि दोनों को काबू में किया जा सकता है।
Ego को कम करने के लिए खुद को सही साबित करने की बजाय समझने की कोशिश करें, feedback सुनें, और “मैं गलत हो सकता हूँ” वाली सोच अपनाएं।
Overthinking कम करने के लिए एक्शन लें, अपने पसंद के काम चुने journal लिखें, ध्यान/व्यायाम करें, और खुद से पूछें क्या ये सोच मुझे आगे बढ़ा रही है या सिर्फ घुमा रही है? इस प्रश्न का गहन चिंतन करें।
अंत में ध्यान रखें कि उपरोक्त दोनों मानसिक बीमारियां आधुनिक समाज को काफी नुकसान पहुंचा रही हैं, लेकिन जागरूकता और छोटी-छोटी आदतों से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।






