आचार्य अवधेश झा
गंघटी आश्रम, धर्मागत पुर
पिलखी मुरौल, मुजफ्फरपुर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
कोशिशें जारी है,. कोशिशें जारी है,
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की बारी है।
बच्चे बूढ़े या जवान माँ बहनों की तैयारी है।।
संघर्षों का अपना कलरव गूंज रही किलकारी है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की……
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।
बहुत भरोसा बहुत दिलासा आशाओंकी किरण पुकारी है,
अब न सहेंगे अब न रुकेंगे कब हमने हिम्मत हारी है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की……
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।
कहीं ठांव है कहीं ठिठोली कैसी यह तैयारी है,
घर आंगन जन जन में गूंजे अब स्वागत की बारी है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की……..
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।
चाक चौकसी जन सेवा अर्पण करने की बारी है,
मिलकर हाथ हाथ से जोड़ें जुड़ने की तैयारी है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की…..
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।
शस्त्र शास्त्र का युद्ध नहीं हैं न लड़ने की बारी है,
मनन गहन करने का अवसर मौका यह सुविचारी है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की……
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।
सड़क पुलहिया शिक्षालय बढ़ रही बेरोजगारी है,
मदिरालय सब बंद हो गये खुली छूट बिकवाली है।।
कर्मभूमि पर फिर तन मन से मर मिटने की………
कोशिशें जारी है कोशिशें जारी है।।






