वर्तमान की सहजता और भीतर की शांति।

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        लेखक दार्शनिक सूर्य जी संस्कृति के संरक्षक,     समरसता के प्रतीक, आध्यात्मिक चिंतक, महनीय साहित्यकार, मानवतावादी एवं समाज-सुधारक हैं।

 

 

                  (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

                               लेख:

         वर्तमान की सहजता और भीतर की शांति

                        : दार्शनिक सूर्य जी

 

 

          सचेत रहना और वर्तमान समय में जीना ही जीवन की असली सुंदरता है। हम सहृदय अवश्य बने, किन्तु अपने हृदय और मन की शांति को बचाए रखने के लिए उन लोगों से दूरी बनाना भी जरूरी है जो हमारी मानसिक शांति को छीनने का प्रयास करते हैं। अपने भीतर की प्रसन्नता, संवेदनशीलता और दयालुता को बनाए रखें, लेकिन हर किसी के सामने खुली किताब बनने से बचें।

 

               यह जीवन बेहद विराट है। जो लोग इसे जीने में देर करते हैं या चिंताओं में खोए रहते हैं, उनके लिए यह बहुत छोटा है। इसके विपरीत, जो इसे पूरी तरह और सहजता से जीने लगते हैं, उनके लिए यह अनंत संभावनाओं से भर जाता है। जब हम अपने ‘आत्म’ से जुड़ते हैं, तो जीवन समस्याओं से मुक्त हो जाता है। खुलकर हँसना और हर पल को बिना किसी चिंता के जीना ही इस जीवन का सबसे श्रेष्ठ उपहार है।

 

              संसार में ऐसे अनेक लोग हैं जो भीतर ही भीतर गहरे घाव लेकर जी रहे हैं, रो रहे हैं; पर समय के साथ वे भी शांत हो जाते हैं। इसलिए, हर दिन को और बेहतर बनाने की कोशिश करें। जागरूक, सचेत और शांत होकर जीने में ही इस जीवन की वास्तविक सार्थकता है।

 

 

 

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