विश्व कविता  अडिंक्रा

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विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

(पूर्व मुख्य अभियंता)

(लंदन प्रवास पर)

   

            (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

विश्व कविता

 

 अडिंक्रा

 

 

वस्त्रों पर चिह्न की भाषा

अंकित की जाती है 

“घाना” में 

 

प्रतीक चिन्ह 

जिनमें होते हैं लोक संदेश

 

“माते मासिए” 

 का अर्थ है, 

 “जो सुनता हूँ, उसे सँजोकर रखता हूँ”।  

 

“सांकोफा” है, 

जिसमें पीछे की ओर मुड़कर देखने वाला पक्षी 

अतीत से सीखकर 

उसे वर्तमान में वापस लाने की बुद्धि का संकेत है। 

 

वस्त्र पर

एक छोटा-सा

कला चिह्न।

 

न कोई वाक्य,

न कोई पुस्तक,

न कोई लंबा व्याख्यान।

बस

एक छोटी सी आकृति।

 

यह एक पूरी 

कहावत है।

 

मैं चकित था।

छोटी सी बात कहने में

कितने शब्द खर्च करते हैं हम, 

फिर भी जो 

समझना ही 

नहीं चाहते 

वे 

नहीं ही सुनते 

घर, समा, संसद में 

यूनाइट नेशंस में 

 

और एक संस्कृति

सदियों की स्मृति

एक चिह्न में 

अंकित कर देती है

अंगोछे पर 

 

चिह्न

कपड़े पर छपता है,

पर उसका अर्थ

पीढ़ियों में 

व्याप्त होता है।

 

किसी में चित्र में 

साहस है,

किसी में धैर्य,

किसी में नेतृत्व,

किसी में विनय,

और किसी में

वह पुरानी बुद्धि

कि 

“जो सुना है

उसे व्यर्थ मत जाने दो।”

 

सोचता हूँ,

क्या मनुष्य भी

एक ऐसा ही चिह्न नहीं?

 

चेहरा

कुछ कहता है,

आँखें

कुछ और,

मौन में

कितनी अनकही

कहानियाँ छिपी होती हैं, हमारे।

 

हम पढ़ते हैं

चेहरे,

पर

अर्थ नहीं पढ़ते।

 

हम

मुस्कान के आवरण को

सुख समझ लेते हैं,

चुप्पी को

सहमति,

और आँखों में ठहरी

नमी को

कहां समझ पाते हैं हम।

 

कितनी जल्दी

हम मनुष्य को

उसके शब्दों में बाँध देते हैं।

जबकि

उसका असली मंतव्य

कभी 

एक मौन होता है।

 

शायद

इसीलिए कुछ संस्कृतियाँ

प्रतीक बनाती हैं,

ताकि

जो शब्दों से छूट जाए

वह आकृति में बचा रहे।

 

एक चिह्न,

एक कहावत,

एक स्मृति,

और उसके भीतर

एक पूरा जीवन कथ्य।

 

शब्द समाप्त हो जाएँ

तो भी

अर्थ समाप्त नहीं होता।

 

कभी

एक आँख का इशारा पर्याप्त होता है,

एक स्पर्श,

एक मौन,

एक पलटकर देखी 

 हुई दृष्टि।

 

और कभी

कपड़े पर बना

एक छोटा-सा 

अंड्रिका चिह्न

कह देता है

वह सब

जो हम

पूरी किताब लिखकर भी

नहीं कह पाते, कई बार।

 

 

(संदर्भ: अडिंक्रा घाना के असांते समुदाय की दृश्य प्रतीक-परंपरा है, जिसमें वस्त्रों पर अंकित चिह्न विशिष्ट कहावतों, विचारों और जीवन-मूल्यों को व्यक्त करते हैं।)

 

 

 

 

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