सौजन्य: भारतीय दार्शनिक सूर्य
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
अंतस का उजास
(दार्शनिक काव्य)
मन को मजबूत बनाए रखो,
अगर मन मजबूत है
तो सब कुछ तुम्हारे पास है।
धैर्य
कमाल की चीज़ है,
इसे थामे रखो
सब ठीक हो ही जाएगा।
और प्रेम…
प्रेम तो संसार की
सबसे कोमल अनुभूति है।
हम प्रेम में होते हैं,
जीवन सुंदर हो जाता है,
हर ओर
फूल ही फूल खिल जाते हैं।
इसलिए हर पल को सहेज कर जियो,
बहस से बचो,
क्योंकि जीवन वही है
जो आज हम जी रहे हैं।
(यह कविता आध्यात्मिक विचारक, दार्शनिक, मानवतावादी व संस्कृति एवं समरसता के संरक्षक, युगपुरुष ‘सूर्य जी’ द्वारा रचित है, जो एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी हैं।)







