गजल

Spread the love

 

राजेन्द्र रंजन गायकवाड                                           (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)                        बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 
                                                   

                    (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                                            (w)6395080071

 

             गजल

वफा की राह में, सबको धोखा ही मिला,

मिला हर इश्क में, एक ही है सिलसिला।

किया था प्यार जिसे, हमने सब छोड़कर,

उससे दर्देदिल का, कैसे करें कोई गिला।

भुला डाले वादे सारे, एक पल में उसने,

वो तोड़कर रिश्ता, हमसे बहुत दूर चला।

हमें बर्बाद करके, हँस रहे हैं सारे दोस्त,

ज़माने में दोस्ती का, दस्तूर देखने मिला।

चलो अब छोड़ दें, उम्मीद सबसे “रंजन”

कैसे भूले वो, लूटी मोहब्बत का काफिला।

 

  • Related Posts

    शरद पूर्णिमा महारास : मन के चंद्रमा पर इंद्रियों का नृत्य।

    Spread the love

    Spread the love  डॉ. दीपक गोस्वामी                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                             …

    “तू दीपक हैं, तुझे जलना है, बुझना नहीं है”

    Spread the love

    Spread the love  लेखिका/कवयित्री                                                    सुश्री…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    शरद पूर्णिमा महारास : मन के चंद्रमा पर इंद्रियों का नृत्य।

    • By User
    • October 24, 2026
    • 2 views
    शरद पूर्णिमा महारास : मन के चंद्रमा पर इंद्रियों का नृत्य।

    “तू दीपक हैं, तुझे जलना है, बुझना नहीं है”

    • By User
    • October 24, 2026
    • 11 views
    “तू दीपक हैं, तुझे जलना है, बुझना नहीं है”

    गजल

    • By User
    • October 24, 2026
    • 14 views
    गजल
    • By User
    • October 24, 2026
    • 9 views

    कर्मफल (भाग 9)

    • By User
    • October 24, 2026
    • 14 views
    कर्मफल (भाग 9)

    अंतस का उजास (दार्शनिक काव्य)

    • By User
    • October 24, 2026
    • 11 views
    अंतस का उजास  (दार्शनिक काव्य)