राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
गजल
वफा की राह में, सबको धोखा ही मिला,
मिला हर इश्क में, एक ही है सिलसिला।
किया था प्यार जिसे, हमने सब छोड़कर,
उससे दर्देदिल का, कैसे करें कोई गिला।
भुला डाले वादे सारे, एक पल में उसने,
वो तोड़कर रिश्ता, हमसे बहुत दूर चला।
हमें बर्बाद करके, हँस रहे हैं सारे दोस्त,
ज़माने में दोस्ती का, दस्तूर देखने मिला।
चलो अब छोड़ दें, उम्मीद सबसे “रंजन”
कैसे भूले वो, लूटी मोहब्बत का काफिला।






