ब्यूरोः (नया अध्याय)
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प्रख्यात जनवादी रचनाकार ऋतुराज नहीं रहे।
वे 86 साल के थे और प्रोस्टेट की बीमारी से जूझ रहे थे।
मीरा पुरस्कार, बिहारी पुरस्कार और पहल सम्मान से सम्मानित ऋतुराज की कविता “कन्यादान” बेहद लोकप्रिय रही है।
उक्त कविता राजस्थान के शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम में आज भी पढ़ाई जाती है।
वे प्रगतिशील लेखक संघ के महत्वपूर्ण सदस्य थे।
ऋतुराज की कविताओं का घर कभी-कभी मुझे अपना-सा अपना घर लगता रहा है। उनकी रिक्तता के बाद भी उनकी उपस्थिति बनी रहेगी। उनकी स्मृतियों को विनम्र नमन।






