राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
बड़े अजीब से हो गए हैं रिश्ते, आज-कल,
सब फुर्सत में हैं, वक्त किसी के पास नहीं।
दिलों की दूरियां, बढ़ती ही जा रही हैं रोज,
नजदीक होकर भी, कोई आस पास नहीं।
मोबाइल की स्क्रीन में, सिमट गई है दुनिया,
अपनों की आवाज, सुनने की प्यास नहीं।
सब व्यस्त हैं, आभासी महफिलों में यहाँ,
सच्चे जज्बातों का अब वो अहसास नहीं।
फुर्सत तो बहुत है, घर की चारदीवारी में,
मगर मिलकर बैठने, का वो उल्लास नहीं।
दिखावे की रौनक में खो गए हैं सब लोग
रिश्तों में बची अब वो जानी मिठास नहीं।






