सुश्री सरोज कंसारी लेखिका एवं कवयित्री नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
आलेख **********
प्रेम का हर रूप प्यारा होता हैं –सुश्री सरोज कंसारी
जीवन में उपहार का बहुत महत्व होता हैं, चाहे वो एक छोटा सा तिनका क्यों न हो। अपनो के द्वारा अपनेपन से दिया गया हर चीज प्रिय होता हैं, जिसे हृदयगत भाव की गहराई से दी जाती हैं। देने वाले के मन में जब, स्नेह की एक बूंद भी मिल जाती हैं किसी उपहार में तो वो अनमोल हो जाती हैं।जिसकी तुलना में हर दौलत व्यर्थ हैं। आज जहां- स्वार्थ की भावना प्रबल हैं और एक दूसरे से हम किसी काम से ही मिलते हैं, व्यस्त दिनचर्या में अपनो से और आत्मीय लोगों से कम ही मिल पाते हैं। मिलकर एक साथ बैठकर सुख- दुख सांझा करने से, प्रसन्नता का जो संचार होता है उससे अनावश्यक तनाव कम होते हैं। सिर्फ भौतिक सुख के लिए दौड़ते रहे और फुर्सत के पल न निकाल पाए हंसी- ठिठोली और आपसी कुशलता जानने के लिए तो सब कुछ होकर भी मानसिकता व्याकुल होती हैं। आज तकनीकी के विकास के साथ ही मानव मन की संवेदनाएं हर पल दफन होती है। समय के अभाव के कारण अब आमने -सामने मिलने की प्रथा लगभग कम हो गई हैं। और सोशियल मिडिया ही एक माध्यम हो गया है जिसमें हम पूरी तरह अपनी अभिव्यक्ति नहीं दे पाते। बस औपचारिकता रह गई है। रिश्ते हर पल टूटकर बिखर रहें हैं मोबाईल से एक मिनट दूर होने पर बेचैनी होती हैं।
आज के माहौल में अब वो सुकून नहीं जो पहले थे।जब करीबी जन से सुख-दुख की बाते शुरू होती तो समय का पता नहीं चलता और हर थकान मिट जाती। अपनो को देखकर ही कई समस्याएं दूर हो जाती। लेकिन आज कहीं जरूरी काम से भी गए हो चाहे वैवाहिक कार्य, शोक के किसी मरीज से मिलने जाएं, अजीब दृश्य देखने को मिलते है। जिस काम के लिए गए हैं उस पर कम और मोबाईल में अधिक ध्यान होता है। दिल के बंधन कमजोर हो रहें है और इस मशीन से बनी निर्जीव चीज से अति में लगाव है। चार्जिंग खत्म होने, मोबाईल खो जाने बिगड़ जाने पर चेहरे में जो मायूसी परेशानी दिखती है, ऐसे लगता है सच में बदल गई है भावनाएं। जिसमें परिवारिक जन मित्र और स्नेही जन बसते थे आज उनके स्थान पर फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्ट्राग्राम, टेलीग्राम, यू ट्यूब और भी कई साधन है, जिसमें मस्त हैं लोग। किसी की इतनी परवाह नहीं करते जितना इस स्क्रीन पर टच कर चेटिंग और मैसेज देखने में रुचि लेते हैं। बस कुछ प्रमुख अवसर पर मिलते हैं उसमें भी जल्दबाजी होती है। यहीं वजह है की अंजान है सभी एक दूसरे के विचार, अनुभूति, दर्द और ख्वाब से बाहर तो आकर्षण हैं दिखावटीपन के विभिन्न रंगो में रंगे हैं। पर आंतरिक रूप से अकेले हैं बाते तो बहुत हैं करने को, लेकीन सुनने वाले वो लोग खो गए हैं।
आज कोई भी जानकारी लेनी हो तो गूगल में सर्च कर एक मिनट में सब जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। जो पास हैं, दिल में बसते हैं उन्हें ढूंढ नहीं पा रहे कि-आखिर उनके सपने क्या है, किस तकलीफ में है, क्यों उदास हैं, चाहत क्या है? काश! अंतर्मन के एहसास को भी सुन पाने- देखने और जानने के लिए कोई आविष्कार होते, तो कितना अच्छा होता ? बहुत ही चिंतनीय विषय हैं, रिश्तों को भी कैद कर लिए हैं हम इस मोबाईल में। चाहे कितने भी ऊंचाई पर पहुंच जाएं, आज भी आज भी विपरित परिस्थित में दुख की घड़ी में अपनो की ज़रुरत होती हैं। कंधे पर हाथ रखने, साथ खड़े हो और असीम पीड़ा को सहलाने, हल्का करने और उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए एक आत्मीय स्पर्श की जरुरत हर किसी को होती है। चाहे आप-हजारों फ्रेंड बना लिजिए सोशियल मिडिया में, दर्द में वो लोग ही याद आएंगे जो मन- मस्तिष्क में जो बसे हैं, जो आपसे किसी लोभ-ईर्ष्या या स्वार्थ से नहीं सिर्फ प्रेम से जुड़े हैं, जिसे आपकी चाह हैं, हर मोड़ पर एक पथ-प्रदर्शक हैं।
प्रेम हर रूप में प्यारा ही होता हैं, मोहताज नहीं अमीरी -गरीबी जाति – मजहब की। प्रेम की कोई सीमा नही होती, जिसे दौलत से नहीं तौल सकते। हर स्वार्थ से परे एक सुखद रिश्ता जिसे पाने की प्यास सभी को होती हैं। किसी को खुश रखने और उपहार स्वरूप कुछ देने के लिए हैसियत देखने की जरुरत नहीं। एक इंसान के पास बहुत कुछ होता हैं। जब भी किसी विशेष अवसर पर किसी से हम मिलने जाते है तब अपने व्यवहार व अपनी क्षमता अनुसार कुछ न कुछ भेंट करते हैं, यह एक रिवाज हैं। यदि किसी को हम अपार दौलत देकर सोचते है, उन्हें खुशी होगी, पर कितने दिन वो तो खर्च हो जाएंगे?
आज भी सुप्त- निष्क्रिय और मायूस मन को जागृत करने, उन्हें सांसारिक खूबसूरती का एहसास देने के लिए सिर्फ अपनेपन की जरुरत होती हैं। ऐसे कुछ दे अपने सानिध्य में आने वालो जो स्मृति से कभी ओझल न हो, वक्त के साथ बदले नहीं। हर पल जो उपयोगी हो, मानसिक मजबूती, परेशानी का हल, मीठी बोली सदविचार, संस्कार, सहयोग सच्ची मुस्कुराहट की वजह, मन का मिलन अंतरद्वंद से निकलने के उपाएं, आगे बढ़ने के मार्ग मंजिल का पता सकारात्मक सोच, मुश्किल पल में साथ भटकने पर नई राह थकान में उत्साह ये कीमती उपहार देने से हर इंसान को नई ऊर्जा मिलती हैं और हर मोड़ पर आंनद के पल प्रदान करती हैं।
झांककर देखिए! अपने अंदर जो भी अच्छाई हैं उसे समर्पण कर दीजिए सभी को फिर देखिए! जो बदलाव आयेंगे उसे शब्दों में पिरो पाना संभव नहीं। भौतिक वस्तुओं के पीछे जीवन निर्वहन हेतु रोटी-कपड़ा और मकान के साथ ही जो अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दौड़-भाग करते हैं वो बाह्य सुख हैं, जो आजीवन चलती हैं। एक के बाद दूसरी जरूरत तैयार हो जाती हैं, पर तृप्ति नही मिलती। जीवित रहने के लिए, भूख की आग को शांत करने, तन ढकने और सुरक्षित रहने के लिए शारीरीक श्रम करते हैं और आरंभ से अंत तक चलते ही हैं। कभी थकते- रुकते, उलझते- रूठते, शिकायत करते अफसोस भी होता है, पर ठहरते नहीं। मन हो या न हो अपनो के लिए और स्वयं के लिए सांसारिक बंधन के विभिन्न रस्म -रिवाजों को मानना और अनंत कष्ट सहकर भी जीने के लिए जरूरी संसाधन जुटाना ही पड़ता है। ये तो प्रकृति का नियम हैं- जैसे भी हो हालात अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी ही पड़ती हैं।संघर्ष के पथ पर चलना ही है, चाहे रोकर करे या हंसकर पर गुजारा तो करना पड़ता हैं।
मन में बहुत सी योजनाएं बनाते हैं, वो मिटते हैं फिर ख्वाब बुनते हैं पर स्थाई होकर नहीं रहते। बनने और बिगड़ने के बाद ही नए विकल्प मिलते है। जिंदगी हर पल खर्च होती है और हमें लगता हैं नया दिन नया माहौल मिल रहा हैं। समझ ही नहीं पाते करना क्या है और गुजर जाती हैं? इसका कारण कल्पना के धरातल में उड़ान बहुत आसान हैं, हकीकत का सामना करने के लिए अंतरद्वंद से निकलना जरूरी हैं। कौन- कैसे हैं क्यूं हैं, इस प्रश्न में एक बार उलझ गए तो सुलझना कठिन होता ?जिसको जैसे रहना है, वैसे ही रहेंगे अपनी दुनिया में। हमें कैसे रहना इस पर चिंतन जरूरी हैं ?हर पल को जीवन के अनुकूल बना लें। कल के इंतजार में बैठे रहेंगे तो हो सकता है आज में कुछ बेहतर न कर पाए। जब अफसोस हावी हो जाती हैं किसी बात की ह्रदय में, तो हर पल उथल-पुथल होती हैं। उम्मीद करना ठीक हैं पर दूसरो से नहीं खुद से करें। वो हुनर विकसित किजिए जो आपमें पहले से हैं। अपने प्रति ईमानदार रहकर ही असीम खुशी को प्राप्त कर सकते हैं। औरों को धोखा देकर,, झूठ बोलकर बहाने बनाकर कभी सही कार्य नहीं कर सकते।
याद रखिए! जो भी बदलाव करना हैं जो पाना हैं उसे एक संकल्प लेकर पूर्ण करे। सिर्फ सोचते रहें और प्रयास न करे तो मंजिल कैसे मिलेगी? छोड़ दीजिए चिंता करना और अपनी मदद करिए। संतुष्टी पाने के लिए आत्मा से जुड़िए और जो चाहते हैं उसे दिल से करने में जुट जाएं। भ्रम में मत रहिए की भविष्य में बहुत कुछ मिल पाएगा, जो हैं आज में हैं। बस श्रेष्ठ कर्म करते रहिए और वहीं भेंट करें जो सभी के हित में हैं। जब निराश होने लगे और मन में बुरे खयाल आए, तो सब कुछ भूलकर घूम आईए अपने आसपास देखिए! बाकी लोगों से आपकी स्थिति कैसी हैं? दुनिया के किसी कोने में कोई पूर्ण सुखी और शांत मन के मनुष्य मिले तो पूछिए, उनके जीवन में ये चमत्कार कैसे हुए? जहां सभी भाग रहें है कुछ न कुछ पाने के लिए वे स्थिर हैं। दुख से हारकर भी लोग कभी-कभी अपने हर सुख से समझैता कर लेते हैं फिर उन्हें दुनिया से कुछ लेने की बजाएं देना ही पसंद होता हैं। त्याग- तपस्या और साधना में बहुत शक्ति होती हैं। जिससे अंदर से मजबूती मिलती हैं। सफर की शुरवात तो होती हैं पर स्थाई मंजिल नहीं मिलती। क्योंकि यहां सदा रहने नहीं आए हैं एक दिन मौत के गले तो लगना ही हैं, फिर क्यूं दुखी रहकर हम चिंता में डूब जाते हैं।
जीवन एक यात्रा हैं, जहां बाह्य सौंदर्य को देखकर मोहित न हो। हर पल याद रखें कुछ समय पश्चात लौटना हैं, तो कैसे आनंदित रहकर हर लम्हें को अपना बना ले खुद तय करें।जैसे- किसी मनोरंजन के उद्देश्य से अपनी मनपसंद जगह घूमने जाते है, एक योजना बनाकर निकलते है, प्राकृतिक हो या धार्मिक उस स्थान के होकर रह जाते है, हर गम से दूर रहते है, प्रपंच भरी जिंदगी को भूल जाते हैं, प्रसन्न होते हैं और अपनी योजना अनुसार चलकर सफर को यादगार बनाने का भरपूर प्रयास करते हैं। नदी- पहाड़, घाटी-झरने के सानिध्य में शांति का अनुभव करते है और जब लौटते है तो नई ताजगी महसूस करते हैं, दोगुनी ऊर्जा से कार्य करते हैं, वैसे ही जीवन को क्षणिक मानकर जीने की कला सीख ले, तो कभी संदेह नहीं होगा। जीवन का सबसे बड़ा उपहार तो हमे ईश्वर ने दिया है मनुष्य के रुप में। तो इसे यूं ही घुटकर क्यूं जीना ? स्वतंत्र विचार रखिए, नफरत के दामन में सिर्फ गम की अंधियारी हैं, प्रेम से जीवन को सफल कर लिजिए।
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