
सुश्री सरोज कंसारी लेखिका एवं कवयित्री नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
आलेख
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मिट्टी के दिये में पंच तत्व का सार होता है।
मिट्टी के दिये शुभ कर्म का प्रतीक।
गहन अंधकार में मंजिल को ढूंढ पाना बहुत ही मुश्किल होता हैं। अंधकार अर्थात अज्ञान जिसमें ज्ञान का अभाव होता हैं। भारतीय संस्कृति में हर पग पर आध्यात्म की गंगा बहती ही रहती हैं जहाँ- सत्संग, प्रवचन,भजन- वंदना प्रार्थना, साधु-संतों के उद्गार मन में आंनद के, सुकून के कुछ अनमोल पल प्रदान हमें करते हैं। उस वक्त हमारा मन सत्कार्य में समाहित हो जाता हैं तब मस्तिष्क से बुरे भाव स्वमेव निकल जाते हैं।
धार्मिक मान्यताएं जीवन को बांधकर रखती हैं नियमों और परम्पराओं से ।ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ाती हैं, मुश्किलों में रास्ता देती हैं। जब हम शांत हृदय से प्रार्थना करते हैं तब वह शक्ति बन जाती हैं। जब गम की गहन उदासी में डूबा हो मन तब खुशियों की कड़ी बन साथ होती हैं अदृश्य आध्यात्म के भाव।
अंधकार में प्रकाश का पर्व हर देहरी पर जलता रहें इसी मंगलकामना का प्रतीक दीप पर्व हैं दीपावली, जिसमें चहुँ दिशा दीपो की रोशनी से जगमग होती हैं दुनिया। मिट्टी के दिये का इस पर्व पर विशेष महत्व होता हैं। मिट्टी से बने दियें हमें संदेश देते हैं कि- मिट्टी में हम जन्म लिए और इसी मिट्टी में मिल जाना हैं। जब तक सांस रूपी तेल हैं तब तक जीवन हैं, उम्मीद की बाती उसमें जलाकर हम अपने साथ पूरे संसार को प्रकाशित कर सकतें हैं।
दिये शुभ कर्म का प्रतीक हैं ,जिसमें सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती हैं। हमें प्रेरित करती है अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर गम के अंधकार में डूबे लोगों के जीवन को प्रकाश वान बनाने की । दीपक जलानें से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती हैं।
आँधी-तूफान से जूझकर भी दीपक सतत जलकर हमें संघर्षशील जीवन के लिए हिम्मत देते हैं। दीपक जलने से आसपास का वातावरण शुद्ध होता हैं, जो हमारी संस्कृति की परिचायक होती हैं। दीप से पवित्र भाव का हृदय में संचार होता जो-हमें कर्मपथ पर सतत होने लिए प्रेरित करते हैं।
मिट्टी के दियें में पंच तत्वों का सार होता हैं। जलते दिये शौर्य की गाथा हैं जो हर परिस्थिति में अडिग रहते हैं ।साहस के साथ खड़े होकर हर चुनौती को स्वीकार करते हैं ।खुद हर पल जलते हैं लेकिन औरो के राह में रोशनी बिखेर देते हैं।
हमें मन में हमेशा उम्मीद के दिये जलाकर रखना चाहिए, इसे कभी बुझने नही देना चाहिए। दिये जैसे निस्वार्थ भाव सेवा पथ पर रहते हैं।
नफरत को मिटाकर प्रेम की ज्योति जलातें हैं। अपनो की खुशी के लिए त्याग- समर्पण होना जरूरी हैं। धन- दौलत, पद-प्रतिष्ठा सब कुछ खोकर भी इसे हम पुनः प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन उम्मीद खो देने पर हम जीवन का सबसे कीमती चीज खो देते हैं। जैसे दिल में धड़कन जरूरी हैं जीने के लिए, वैसे ही बिखरें हुए लम्हों को पुनः समेटने के लिए उम्मीद रखना जरूरी हैं। जीवन के रास्ते काँटो से भरे हुए हैं जिसकी चुभन हर पग पर होती हैं। विविध प्रकार के लोग हैं,सबके अपने विचार होते हैं लेकिन आपको सभी समझें यह जरूरी नहीं। कुछ तोड़ते हैं, गिराते हैं, बिखेरते हैं गिने चुने लोग ही होते हैं आपकी जिंदगी में जो आपको उठाते हैं। लोगों का काम ही होता हैं कभी बातों से कभी छल-कपट दंभ और द्वेष से आपकी मानसिकता को विचलित कर देने की।इंसान की प्रवृति को समझ पाना मुमकिन नहीं। विचित्रताओं से भरी हैं यह दुनिया कौन- कब, कैसी चाल चले आपकी समझ से परे होगी हैं?
कहीं मिठास की चाशनी घुली होती हैं तो कहीं कड़वाहट का अंबार होता हैं। जो अपने जीवन में इन सबसे अलग चलते हैं, जो हजार मुश्किल आने पर भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते, सफलता उन्हीं को ही मिलती हैं। दिया और बाती सदा संग ही रहते है। जब तक उम्मीद साथ हैं दुनिया की कोई हस्ती हमें आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। जिस पल हम उम्मीद खो देते हैं जिंदगी हमें कमजोर- बेबस और लाचार कर देती हैं। जब तक सांस हैं तभी तक अवसर हैं जीने का, तो क्यूँ न हम हर पल एक दिया जलाए रखें उम्मीद के ? ताकि उत्साह की रोशनी हमें कही रुकने न दें,थकने न दें।
दीपावली पर्व का धनतेरस से आरंभ होता हैं। ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन मिट्टी के तेरह दियें जलाकर पूजन करने से तेरह गुणा सुख- समृद्धि, यश- कीर्ति और पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं और माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती हैं। धनतेरस में सभी के लिए निरोगी काया, सुख- शांति की कामना करने से कई गुना लाभ आपके परिवार को मिलता हैं। कोई दुखी- पीड़ित न हो इस हेतु इस दिन सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु…मंत्रोच्चार शुभकारी माना गया हैं।
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