कवयित्री
सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
रायपुर(छ. ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
कविता
————–
मेहनतकश मजदूर हूं
————————————-
सर्दी गर्मी व बारिश भी सहता हूँ
शिकायत किसी से नहीं करता हूँ
अपनी राह ही अनवरत चलता हूँ
पूंजीपति के शोषण का शिकार हूँ
नही मानता फिर भी कभी हार हूँ।
श्रम की नित ही पूजा करता हूँ
कुछ ख़्वाहिश मैं भी रखता हूं
अपनों के ख़ातिर सब सहता हूँ
आलस मैं कभी नहीं करता हूँ
संघर्षो से भी नही मैं घबराता हूँ।
किसी का मोहताज नही रहता हूं
महलों का नही शौक रखता हूँ
अपनी झोपड़ी में खुश रहता हूँ
हर गम को भी मैं पी जाता हूं
दर्द हो कभी तो मैं छुपाता हूँ।
जख्मो पर खुद मरहम लगाता हूँ
वक्त के पहिये में घूमता रहता हूँ
वजूद खुद का नहीं बना पाता हूँ
कुंदन सा कहाँ मैं निखर पाता हूँ
कर्तव्य हरपल अपना निभाता हूँ।
मेहनतकश मैं एक मजदूर हूँ
कौन कहता मैं आज मजबूर हूँ
खून पसीना दिन भर बहाता हूँ
परिवार का तब पेट भर पाता हूँ
अपनी कमाई पर मैं गर्व करता हूँ।।
“””””””‘”””””””””””””””””””








