सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
अध्यक्ष – दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
इंसानियत की राख!
(कविता)
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खौफ का वो मंजर देखा
जबलपुर हादसा गवाह बना
उस गहरी सिस्टम की लाचारी का
जहाँ चंद पैसों की खातिर मानवता मर गई
लहरों का वो शोर व डरी हुई आँखें
एक माँ ने काल के सामने भी
हार न मानी अंत तक अपनी
सीने से चिपकाए रखा खुद का मासूम बालक
इंसानियत-मानवता की राख पर खड़ा
ये कैसा शहर का प्रशासन है
जहाँ सुरक्षा की फाइलें अलमारी में सोती रहीं
और मासूमों की चीखें पानी में दफन हो गईं
सब कुछ है यहाँ मगर
बस..! संवेदनाओं की भारी कमी है
बुझ गए घरों के कई चिराग
अब बस बाकी रह गई है आँखों में नमी।







