राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
रिश्ता !
(कहानी)
भरोसे की मखमली धूप थी लेकिन रामपुर गाँव के छोर पर बने उस छोटे से घर के आँगन में सन्नाटा था। यह सन्नाटा खामोशी का नहीं बल्कि एक गहरे सुकून का था। साठ साल के बूढ़े माधव जी और उनकी पत्नी सरला धूप में बैठे थे। माधव जी अखबार पढ़ रहे थे और सरला जी स्वेटर बुन रही थीं।
दोनों के बीच कई घंटों से कोई बात नहीं हुई थी। माधव जी को चश्मा साफ़ करना होता तो वह सिर्फ हाथ बढ़ाते। सरला बिना देखे ही उनके हाथ में कपड़ा थमा देती। जब सरला की ऊन की गेंदा नीचे गिरती तो माधव जी बिना कुछ कहे झुककर उसे उठा देते उनके बीच शब्द कम लेकिन समझ ज्यादा थी। उन्हें अपनी बात कहने के लिए आवाज़ की जरूरत नहीं पड़ती थी।
गाँव के लोग अक्सर उन्हें देखकर हैरान होते थे। इस उम्र में भी दोनों के बीच कभी कोई ऊँची आवाज़ में बात नहीं सुनाई देती थी। लोग कहते कि क्या इनके बीच कभी झगड़ा नहीं होता?
एक दिन माधव जी की चाय में चीनी कम थी। माधव जी ने एक घूंट पिया, सरला की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए, सरला उनकी मुस्कान का मतलब समझ गई। वह अंदर गईं और चुपचाप थोड़ी चीनी और ले आईं। दोनों के जीवन में तकरार कम और प्यार ज्यादा था वे जानते थे कि छोटी-मोटी कमियाँ तो इंसान का हिस्सा हैं उन्हें मुद्दा बनाकर रिश्ता खराब नहीं किया जाता।
एक शाम सरला जी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई। गाँव के डॉक्टर ने कहा कि इन्हें तुरंत शहर के बड़े अस्पताल ले जाना होगा, जहाँ इलाज में बहुत खर्च आएगा। माधव जी के पास इतने पैसे नहीं थे। वह परेशान हो गए।
लेकिन माधव के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। आज़माने के लिए माधव ने आनन फानन में सरला के रिश्तेदारों को संदेश भेजा सरला एमआईसीयू में भर्ती और हमारा बैंक बैलेंस नहीं है। उन्होंने सरला से कुछ नहीं बताया कि “अब क्या होगा?” या “पैसे कहाँ से आएंगे? चुपके से माधव जी ने अपने सोने का कड़ा, जिसे बीस साल पहले दो किश्तों में बनवाया था आज बाज़ार में दो लाख रुपये में गिरवी रख दिया।
अस्पताल में इलाज चल रहा था बच्चे भी आसपास थे। फिर माधव जी ने उदास होकर सोच रहे थे, सरला मेरे के जीवन और आख़िरी सफर की संगिनी है। घर ज़मीन बच्चों के नाम कर चुके थे। सोने का कड़ा तुम्हारी आखिरी निशानी है, मुझे नहीं पता कि मैं इन्हें कभी वापस ला पाऊँगा या नहीं पर सरला को सब सच बता दूंगा।
माधव ने सरला का हाथ थामकर धीरे से कहा, “मैंने ज्यादा किसी को नहीं चाहा लेकिन मुझे आपकी जिंदगी पर पूरा भरोसा है आप ठीक हो जाइए, आप मेरे लिए वही सबसे बड़ा वरदान/ धन है।
शहर के अस्पताल में इलाज सफल रहा,, मंहगा मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल ने डेढ़ लाख बिल दिया लिखें सरला पूरी तरह ठीक होकर घर लौट आई। दूसरे दिन एकाएक सरला की नज़र माधव के हाथ पर पड़ी तो सन्न रह गई बोली आपका सोने का कड़ा ?
माधव जी हंस कर बोले – अरे ! उसे गिरवी रखा है,, जल्दी उठा लूंगा ,, मेरी जीवन बीमा पॉलिसी पक्की हो गई है। सरला की आंखों में आंसू थे,, जो आदमी जीवन भर सबको सब करता रहा,, आज अपने हाथ कड़ा भी मुझे बचाने के लिए गिरवी रख दिया। आज एक आदमी उसके साथ आर्थिक रूप से तैयार नहीं था, मतलबी लोग फोन करके अपनी मज़बूरी का रोना रो रहे थे।
दूसरे दिन माधव के सेलफोन पर घंटी बजी,,,मैं बजाज कोटक बैंक से भारती बोल रही हूं सर,, आपकी पॉलिसी मैच्योर हो गई है। Kyc लेकर बैंक आ जाओ साढ़े पांच लाख आपके खाते में तीन दिन में जमा हो जाएंगे। माधव जी ने आसमान की ओर देखा और धरती को चूमा,,आज हवाएं गा रहीं थीं। क्योंकि 20 साल पुरानी पॉलिसी का पैसा दो दिन में माधव जी के बैंक खाते में हरे रंग में चमक रहा था।
रिश्तों में शब्द आज भी कम हैं, लेकिन उनकी समझ में आ रहा था उनका सरला से प्यार और उनका कायनात पर भरोसा पहले से भी ज़्यादा गहरा हो चुका है। सचमुच, असली रिश्ते शब्दों के मोहताज नहीं होते, वे भरोसे की डोर से बंधे होते हैं। साथ ही विषम परिस्थितियों में स्वार्थी कीड़ों की कलई खुल जाती है।







