रचनाकार – बाल कवि अनुराग बघेल
बिजराकापा खुर्द मुंगेली (लोरमी)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
माँ शेरावाली
हे! माँ शेरावाली,
अपने सिंह पर सवार होकर आना।
इस सच्चे भक्त के घर को,
तुम पावन धाम बनाना।।
दर्शन दे दो जगदंबा माता,
मेरी किस्मत को संवारे।
तेरे सिवा इस दुनिया में,
कौन सुनेगा कष्ट हमारे?
हाथ जोड़कर खड़ा द्वार पर,
बालक तुम्हें बुलाता है।
तेरी महिमा गा-गाकर ही,
जीवन का सुख पाता है।।
चरणों में तेरे झुक जाए,
इस युग का हर एक अभिमान।
तेरी दया से मिलता है,
निर्धन को भी जग में मान-सम्मान।।
ममता का आँचल फैलाकर,
सब पर कृपा बरसाती हो।
अंधियारे जीवन में माँ तुम,
रोशनी का दीप जलाती हो।।
सुन लो माँ पुकार हमारी,
अब और न हमें तरसाओ।
लेकर आशीषों का अमृत,
मेरे घर तुम आ जाओ।।
नैया मेरी भव-सागर से,
तुम पार लगाती हो।
जब भी संकट में पड़ता हूँ माँ,
तुम दौड़ी आती हो।।
आँगन बुहारूँ, राह निहारूँ,
मन में खुशियाँ छाई हैं।
झूम रहा है आज यह जग,
जब मेरी मैया आई हैं।।
साँसों में जब तक प्राण रहे,
माँ नाम तुम्हारा गाऊँ।
छोड़ के तेरी पावन चौखट,
और कहाँ फिर मैं जाऊँ।।





