अतिवीर जैन “पराग”
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
दीप से दीप जलाए हम
दीप से दीप जलाए हम,
अंधियारा भगाए हम।
अमावस्या हो जाए पूर्णिमा,
ऐसी रोशनी फैलाए हम॥
हर घर में एक दीप जले,
सबका अंधेरा मिटाए हम।
लक्ष्मी-गणेश का पूजन कर,
सब मिल दिवाली मनाए हम॥
खिल बताशे और मिठाई,
मिल बाँटकर खाएँ हम।
दीप से दीप जलाए हम,
अँधियारा भगाए हम॥
गोली और बमों से जवान,
सीमा पर दिवाली मनाते हैं।
सीने पर ही गोली खाते,
शहादत से नहीं घबराते हैं॥
एक दिया शहीदों के नाम का,
जवानों के लिए जलाएँ हम।
दीप से दीप जलाए हम,
अँधियारा भगाए हम॥
अंतर का तम मिटाकर,
सबको गले लगाएँ हम।
जन-गण के मन मिलाकर,
खुशियों के दीप जलाएँ हम॥
दीप से दीप जलाए हम,
अँधियारा भगाए हम।
अमावस्या हो जाए पूर्णिमा,
ऐसी रोशनी फैलाए हम॥
(विभूति फीचर्स)






