सौजन्य:डॉ.यल.कोमुरा रेड्डी
(नया अध्याय, देहरादून)
छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए संकाय का निरंतर उन्नयन आवश्यक है! प्राचार्य;आ. कलुवुकुण्टा रामकृष्णा
S.R.R. सरकारी कला और विज्ञान महाविद्यालय में आंतरिक संकाय विकास कार्यक्रम का सफल आयोजन


करीमनगर: 30 अप्रैल, 2026 स्थानीय S.R.R. सरकारी कला और विज्ञान महाविद्यालय (स्वायत्त) में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (IQAC) के तत्वावधान में एक दिवसीय ‘आंतरिक संकाय विकास कार्यक्रम’ (FDP) का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षण कौशल में निखार लाना और आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों से संकाय सदस्यों को अवगत कराना था।
शिक्षण केवल पेशा नहीं, राष्ट्र निर्माण है
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि एक शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “संकाय सदस्यों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित प्रयास करने चाहिए। आज के प्रतिस्पर्धी युग में छात्रों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक कौशल से भी लैस करना हमारी जिम्मेदारी है।”
सत्र एवं मुख्य वक्ता
कार्यशाला में दो मुख्य तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विषय विशेषज्ञों ने संकाय विकास के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला:
संकाय विकास की अवधारणाएँ: महाविद्यालय के उप-प्राचार्य एवं संसाधन व्यक्ति श्री पी. नितिन ने प्रभावी शिक्षण के लिए सहायक विभिन्न आधुनिक अवधारणाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कैसे एक शिक्षक अपनी शिक्षण शैली में नवीनता लाकर कठिन विषयों को भी सरल बना सकता है।
मेंटर-मेंटी (Mentor-Mentee) प्रणाली: IQAC समन्वयक एवं संसाधन व्यक्ति सुश्री हरजोत कौर ने “मेंटर-मेंटी” अवधारणा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक शिक्षक, मार्गदर्शक (Mentor) की भूमिका निभाकर छात्र(Mentee) की शैक्षणिक और व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान कर उसके भविष्य को संवार सकता है। उन्होंने इसके सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक चरणों को भी साझा किया।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वी. राजेशम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में उप-प्राचार्य राजय्या, IQAC टीम के वरिष्ठ सदस्य डॉ. सोमनरसाय्या, डॉ. करुणाकर, डॉ. ताहिर तथा NAAC समन्वयक डॉ. बी. चंद्रशेखर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यशाला के अंत में संकाय सदस्यों के बीच एक संवाद सत्र भी हुआ, जहाँ शैक्षणिक चुनौतियों और उनके समाधानों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं छात्र भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।






