वीरगति दिवस विशेष (20 जनवरी)

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हरी राम यादव,  सूबेदार मेजर (ऑनरेरी)

अयोध्या, (उ. प्र.)

 

           वीरगति दिवस विशेष (20 जनवरी)

 

                   ‘सिग्नलमैन चंदन कुमार राय’

 

समाज में दो तरह के लोग होते हैं, एक वह जो अपने लिए जीते हैं। पूरी जिन्दगी पद, पैसा एवं प्रतिष्ठा के पीछे भागते रहते हैं और जरुरत पड़ने पर देश तथा समाज के लिए अपना हाथ खींच लेते हैं। दूसरे वह जो अपने देश, समाज और मातृभूमि के लिए जीते हैं और अवसर आने पर अपना सर्वस्व बलिदान कर देते हैं। यह देश और समाज ऐसे ही लोगों को अनंतकाल तक याद रखता है और इनकी ही कहानियां समाज में कही और सुनीं जाती हैं। आज एक ऐसे ही वीर सपूत का वीरगति दिवस है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, इस वीर सपूत का नाम है – सिग्नलमैन चंदन कुमार राय, जो कि अपने नाम के अनुसार माँ भारती के भाल का तिलक बने।

 

जनपद पुंछ, जम्मू कश्मीर का एक सीमावर्ती जिला है और यह हमेशा दुश्मन के निशाने पर रहता है, इस क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा ही जिम्मेदारी संयुक्त रूप से स्थानीय पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और राष्ट्रीय राइफल्स के पास होती है तथा बाह्य सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल और राष्ट्रीय राइफल्स के पास होती है। इसी पुंछ जिले का एक सेक्टर है मनकोट, सन 2018 में यहीं की एक सीमावर्ती पोस्ट पर तैनात थे 37 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक और जनपद चंदौली के वीर सपूत सिग्नलमैन चंदन कुमार राय ।

 

18 जनवरी 2018 को पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा के पास मेंढर सेक्टर में मोर्टार, छोटे हथियारों और स्वचालित हथियारों से अकारण अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान सेना ने समूची अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर अगले दो दिनों में सीमावर्ती नागरिकों और भारत की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाते हुए अपनी गोलाबारी बढ़ा दी। पाकिस्तान की ओर से की जा रही इस फायरिंग में रणवीर सिंह पुरा और कानाचक में तीन ग्रामीणों की असामयिक मृत्यु हो गई।

 

पाकिस्तान सेना ने नागरिक क्षेत्रों में अधिकतम नुकसान पहुंचाने के लिए 120 मि.मी मोर्टार और 82 मि. मी मोर्टार सहित भारी कैलिबर की लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया। इस फायरिंग में जम्मू जिले में सीमा पर हो रही गोलाबारी से 81 गांवों के लोग प्रभावित हुए और लगभग 41,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। 18 जनवरी को शुरू हुई इस गोलाबारी में ज्यादातर अरनिया, रणवीर सिंह पुरा और सुचेतगढ़ इलाके प्रभावित हुए। 19 जनवरी तक यह गोलाबारी सांबा और कठुआ जिलों तक फैल गई। इस फायरिंग से माढ़ क्षेत्र भी अछुता ना रहा , वहां पर भी पाकिस्तानी सेना द्वारा भारी गोलाबारी की गयी। पाकिस्तानी सेना द्वारा सीजफायर के इस भीषण उल्लंघन का मुंह तोड़ जबाब देते हुए सीमा सुरक्षा बल के 02 जवान, सेना के 03 जवान और 07 नागरिकों समेत कुल 12 लोग बुरी तरह घायल हुए / वीरगति को प्राप्त हो गए ।

 

इसी हमले में देश की एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए सिग्नलमैन चंदन कुमार राय गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें पास के सैन्य अस्पताल में ले जाया गया लेकिन ज्यादा जख्मी होने के कारण 20 जनवरी 2018 को 25 साल की छोटी उम्र में वह वीरगति को प्राप्त हो गए।

 

सिग्नलमैन चंदन कुमार राय का जन्म उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में 21 दिसम्बर 1992 को श्रीमती लीलावती राय और श्री सत्य प्रकाश राय के यहाँ हुआ था । इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्राम सभा नदेसर के नंदेश्वर महादेव और हाई स्कूल की शिक्षा टाउन नेशनल इंटर कॉलेज, सैदपुर तथा इंटर एवं स्नातक की शिक्षा जटाधारी महाविद्यालय से पूरी की । 22 जनवरी 2011 को यह शाखा भर्ती कार्यालय, वाराणसी से सेना में भर्ती हुए और प्रशिक्षण के लिए सिग्नल कोर प्रशिक्षण केंद्र, गोवा चले गए। प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग चंडीगढ़ एवं दूसरी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई। इनके परिवार में इनके माता पिता, इनकी दो बड़ी बहने – रीना और पूजा तथा छोटा भाई मोहित और छोटी बहन हेमा हैं।

 

सिग्नलमैन चंदन कुमार राय की वीरता और बलिदान को याद रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जनपद चंदौली और वाराणसी को जोड़ने वाले बलुआ सेतु का नामकरण अमर बलिदानी चंदन राय के नाम पर तथा उनके घर के नजदीकी चौराहे मारूफपुर से मझिलेपुर वाया रामगढ़ (बाबा कीनाराम स्थल) को जाने वाले मार्ग का नामकरण अमर शहीद चंदन राय के नाम पर किया है। उनकी वीरगति के सम्मान में ग्राम सभा में संचालित प्राथमिक विद्यालय की अतिरिक्त खाली भूमि पर उनका स्मारक स्थल बनाया गया है तथा अभी हाल ही में ग्रामसभा नादेसर मारुफपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय का नामकरण बलिदानी चन्दन कुमार राय के नाम पर किया गया है।

 

सिग्नलमैन चंदन कुमार राय के वीरगति दिवस पर इनके परिजन विगत 05 वर्षों से अनवरत जनपद चंदौली के साथ साथ वाराणसी, गाजीपुर इत्यादि जनपदों के वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिजनो को सम्मानित करते है, साथ ही सेवानिवृत्त सैनिकों, पत्रकारों और जनपद के मेधावी छात्रों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन करते हैं।

 

 

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