राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
शिक्षक की समस्याऐं ?
(शिक्षक दिवस विशेष)
आधुनिक समय में भारतीय शिक्षकों के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ हैं। ये चुनौतियाँ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग रूप में दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ मुख्य मुद्दे लगभग पूरे देश में आम हैं।
पहली सबसे बड़ी समस्या है, बड़ी कक्षाएँ और संसाधनों की कमी कई सरकारी स्कूलों में एक शिक्षक को 40–60 या उससे अधिक छात्रों को एक साथ पढ़ाना पड़ता है। पर्याप्त कक्षाएँ, किताबें, प्रयोगशालाएँ, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी आम है, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में अधिक।
दूसरी समस्या है, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी चुनौती NEP 2020 और कोविड के बाद डिजिटल शिक्षा पर जोर बढ़ा है, लेकिन
कई शिक्षकों को डिजिटल टूल्स (Google Classroom, Zoom, AI टूल्स आदि) का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल रहें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की समस्या बनी हुई है।
डिजिटल डिवाइड के कारण गरीब छात्रों तक पहुँचने में कठिनाई होती है।
तीसरी समस्या प्रशासनिक बोझ और कागजी काम शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा बहुत सारा प्रशासनिक काम करना पड़ता है रिपोर्ट भरना, डेटा अपलोड करना, सर्वेक्षण, विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन आदि। इससे वास्तविक शिक्षण का समय कम हो जाता है।
चौथी समस्या है,पाठ्यक्रम परिवर्तन और निरंतर प्रशिक्षण की जरूरत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बड़े बदलाव हो रहे हैं। नए पाठ्यक्रम, आकलन पद्धति और दक्षता-आधारित शिक्षा के लिए शिक्षकों को नियमित रूप से अपडेट रहना पड़ता है, लेकिन कई जगहों पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
पांचवी समस्या है ,वेतन, सुरक्षा और सम्मान की समस्या कई राज्यों में संविदा/अतिथि शिक्षकों का वेतन कम और अनिश्चित होता है।
कुछ क्षेत्रों में शिक्षकों को राजनीतिक दबाव, स्थानीय हस्तक्षेप और कभी-कभी हिंसा का भी सामना करना पड़ता है। समाज में शिक्षक के सम्मान में कमी महसूस की जाती है।
छठवीं समस्या है, छात्रों की बदलती जरूरतें और मानसिक स्वास्थ्य, छात्रों में स्क्रीन टाइम बढ़ने, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होने और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं।
शिक्षकों को अब सिर्फ विषय नहीं, बल्कि जीवन कौशल, मानसिक स्वास्थ्य और मूल्य शिक्षा भी सिखानी पड़ रही है, जिसके लिए वे हमेशा तैयार नहीं होते।
सातवीं समस्या है, ग्रामीण-शहरी असमानता
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक अक्सर अकेले कई कक्षाएँ संभालते हैं, जबकि शहरी निजी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा और माता-पिता का अत्यधिक दबाव ज्यादा होता है।
आठवीं समस्या है, मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली का दबाव बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव शिक्षकों पर भी पड़ता है। उन्हें परिणाम सुधारने का दबाव रहता है, जबकि छात्रों की वास्तविक समझ और रुचि पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। इन सभी समस्याओं का सामना करता हुआ,, हर शिक्षक अपनी ड्यूटी पर लगन और अनुशासन से करता है। अपवाद स्वरूप कुछेक शिक्षक आचरण संहिता का पालन नहीं करते हैं।
हर क्षेत्र के गुरु ( शिक्षक) को नमन।







